सातवीं जेपीसी को लेकर हाईकोर्ट के मौखिक टिप्पणी के बाद छात्र छात्राएं संतुष्ट

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हाई कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई आज हुई इस सुनवाई में झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन जी ने मौखिक टिप्पणी किया कि जेपीएससी की गलती की सजा छात्र-छात्राएं क्यों भुगते ?पूरे बहस के दौरान न्यायधीश महोदय ने यह इशारा भी किया कि आखिर जिनका उम्र समाप्त हो रहा है उन्हें मौका क्यों नहीं दिया जा रहा है? उन्होंने यह भी कहा की छात्र छात्राओं को देखते हुए उन्हें रियायत दी जानी चाहिए थी ?अब ऐसा उम्मीद नजर आ रहा है कि साथ में जेपीएससी के लिए हजारों की संख्या में जो छात्र-छात्राएं उम्र सीमा के लिए इंतजार कर रहे हैं, उन्हें 2011 अथवा 2012 मिल सकता है जिरह के दौरान यह चीजें भी सामने आई कि पूर्व में जब विज्ञापन निकाला गया था तो उसमें वर्ष 2011 कट ऑफ डेट था लेकिन बाद में इसे 2016 कर दिया गया। अगर जेपीएससी प्रति वर्ष परीक्षा नहीं लेती है तो क्या वह छात्र छात्राओं के हित में सोच भी नहीं सकती है क्या? आज कुछ चीजें स्पष्ट हो गई कि जेपीएससी ने उम्र सीमा में छूट ना देकर भारी गलती की है ऐसे में सातवीं जेपीएससी का फिर से डेट बढ़ना अब तक माना जा रहा है ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जेपीएससी परीक्षा पर ग्रहण लगा हुआ है बिना कोर्ट मुकदमे का कोई भी सुनवाई सही तरीके से हो ही नहीं पाती है


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