Abtakdesk
एक दिन पहले ही रांची के पास चांहो में 20 एकड़ जमीन पर एकलव्य विद्यालय शिलान्यास को लेकर बवाल हुआ यह पहली बार नहीं हुआ है .इसके पहले आईआईटी कैंपस खोलने को लेकर ,लॉ यूनिवर्सिटी खोलने को लेकर ,डैम बनाने को लेकर ,सेंट्रल यूनिवर्सिटी खोलने को लेकर, एम्स बनाने को लेकर ,एयरपोर्ट बनाने को लेकर ऐसा विरोध हो चुका है और काला झंडा अलग-अलग पार्टी को दिखाया जा चुका है तो क्या आने वाली पीढ़ी अब झारखंड में विकास के सभी रास्ते को रोक रही है.
सवाल यह उठता है कि जब 24 घंटे बिजली हर ग्रामीण को चाहिए तो फिर बिना जमीन दिए हुए डैम कैसे बनेगा ?अगर स्कूल की बेहतर शिक्षा चाहिए तो बिना स्कूल खोले हुए शिक्षा कैसे दिया जाएगा? आने जाने के लिए झारखंड के लोगों को यातायात की सुविधा चाहिए तो बिना एयरपोर्ट का यह कैसे संभव होगा?
अब जरा दूसरी तस्वीर को देखिए हाल ही में देवघर में ,दुमका में एम्स के नए कैंपस का उद्घाटन हुआ इसमें यहां के बच्चे ही पढेगे और बाहर के बच्चे भी आएंगे लेकिन इस एम्स के खुल जाने से आसपास के गांव की आधारभूत संरचना विकसित हो जाएगी, गांव के स्थानीय लोगों को नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे झारखंड का विकास संभव हो पाएगा ।झारखंड में लगभग प्रत्येक प्रकार का खनिज संसाधन मौजूद है। यहां की पहाड़ पहाड़ियां नदी झरने कृषि पर्यटन केंद्र से कम किसी मायने में नहीं है ।इसके बावजूद पर्यटक झारखंड छोड़कर राजस्थान गुजरात हिमाचल प्रदेश बंगाल सिक्किम चले जाते हैं इसका मूल कारण पर्यटक को ना मिलने वाली सुविधा और ग्रामीणों द्वारा उनके साथ किया गया दुर्व्यवहार है जो अखबारों में प्रमुखता के साथ आती है यही कारण है कि कि पिछले कई दशक से झारखंड में कोई भी निवेशक पैसा लगाने को तैयार ही नहीं है यहां विरोध सिर्फ केंद्रीय मंत्री का नहीं हुआ बल्कि उस विकास का भी हुआ जो हर लोग चुनाव के पहले चाहता है लेकिन यहां पार्टी और पॉलिटिक्स के चक्कर में ग्रामीण पड़ जाते हैं जो पढ़े-लिखे नेता है वह उन्हें एक अलग ही रास्ता दिखा रहे हैं यही कारण है कि अब झारखंड में ना तो कोई रोजगार की खबर आती है और ना ही विकास की तो फिर क्या यहां के मूलवासी आदिवासी और ग्रामीण सिर्फ इन्हीं झगड़े और पंचायती में फंसे रह जाएंगे