जमशेदपुर का काबरा अपहरण कांड क्या फिर से शुरू होगी जांच एवं इसमें किसकी किसकी गिरफ्तारी हुई जानिए डिटेल्स में

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khurpench Choudhary jharkhandaajtak.in

अपहरणकर्ता ने सबसे पहले शहर के अलग-अलग S.T.D. बूथ से काबरा के घर में कॉल किया।
इसी क्रम में कई S.T.D. संचालक भी उस समय में जांच के दायरे में थे। फिर से, एक बार यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है जिसमें पुलिस बड़ी कार्रवाई भी कर सकती है। कुछ लोगों से फिर से पूछताछ हो सकती है।
जुलाई 2002
साकची के व्यवसायी ओम प्रकाश काबरा अपनी मोबिल ऑयल की दुकान पर थे।
उन्हें एक पेट्रोल पंप दिखाने के बहाने साथ चलने को कहा गया।
रास्ते में उन्हें अगवा कर लिया गया और परिवार से ₹5 लाख की फिरौती मांगी गई।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने फिरौती लेने पहुंचे एक आरोपी को गिरफ्तार किया।
इसके बाद छापेमारी कर ओम प्रकाश काबरा को सकुशल मुक्त करा लिया गया।
जांच में का नाम मुख्य आरोपी के रूप में सामने आया। बाद में उसने अदालत में आत्मसमर्पण किया, लेकिन बाद में न्यायिक हिरासत से फरार हो गया।

नवंबर 2002 – हत्या
6 नवंबर 2002 को साकची स्थित उनकी दुकान में घुसकर ओम प्रकाश काबरा की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
पुलिस अधिकारियों ने उस समय कहा कि यह हत्या फिरौती के लिए नहीं, बल्कि अपहरण

शहर में प्रतिक्रिया
हत्या के बाद जमशेदपुर के व्यापारियों में भारी आक्रोश फैल गया।
व्यापारिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया और तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के सामने कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाया।
अदालत का फैसला
मुकदमे के दौरान कई गवाह मुकर गए या अदालत में पेश नहीं हुए।
पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण कई आरोपियों को बरी कर दिया गया।

यह मामला जमशेदपुर के इतिहास के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में गिना जाता है क्योंकि इसमें अपहरण, फिरौती, पुलिस कार्रवाई, न्यायिक हिरासत से फरारी और बाद में पीड़ित की हत्या—सभी घटनाएँ एक ही प्रकरण से जुड़ी थीं।


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