झारखंड में राजनीतिक सरगर्मी एक और जोरों पर है वहीं दूसरी ओर झारखंड विधानसभा के स्पीकर के न्यायाधिकरण में भी एक सुनवाई चल रही है भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी के खिलाफ दलबदल का मामला बनता है या नहीं बनता बनता है ,इस पर विचार किया जा रहा है .भारतीय जनता पार्टी की ओर से कहा गया है कि निर्वाचन आयोग ने बाबूलाल मारंडी को भाजपा विधायक दल का नेता मान लिया है. मामले की सुनवाई में प्रदीप यादव बंधु तिर्की दीपिका पांडे की ओर से उनके वकील ने भी दल बदल का मामला के मामले में कहा कि स्पीकर का विशेषाधिकार है .अगर बाबूलाल मरांडी की सदस्यता इसी मामले में चली जाती है तो बीजेपी को बहुत बड़ा झटका लगेगा और झारखंड में चल रही सरकार की कॉन्फिडेंस बढ़ जाएगी.
क्या होता है दलबदल का मामला – 1985 ईस्वी में 52 वा संविधान संशोधन के द्वारा दल बदल कानून पहली बार बना था जिसमें यह व्यवस्था की गई थी कि एक तिहाई व्यक्ति ही पार्टी छोड़कर जा सकता है लेकिन बाद में इसमें सुधार करते हुए इसे दो तिहाई कर दिया गया .बाबूलाल मरांडी झारखंड विकास मोर्चा से चुनाव लड़े थे बाद में पार्टी का विलय उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में कर दिया .क्या यह दल बदल का मामला बनता है ऐसे में जेवीएम के अन्य दूसरे विधायकों का रूख प्रमुखता के साथ देखा जा रहा है ।झारखंड सरकार यह कोशिश करेगी कि बीजेपी को वह इस मामले में हरा दे वहीं दूसरी ओर संविधान के मुताबिक लोकसभा अथवा विधानसभा में स्पीकर को यह अधिकार है कि वह दल बदल के मामले में अपने न्यायाधिकरण में सुनवाई करें और फैसला सुना दे