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झारखंड में पिछले कई सालों से शिक्षक नियुक्ति नहीं हुई है। ना ही जेटीईटी की परीक्षा हुई है। इसका सीधा असर यहां के स्कूलों में देखने को मिल रहा है। शिक्षा के अधिकार के तहत शिक्षक होना चाहिए उतना शिक्षक झारखंड में नहीं है ,उदाहरण स्वरूप झारखंड में कुल प्राथमिक विद्यालय 21183 है जबकि आरटीई के अनुरूप शिक्षक वाले स्कूल सिर्फ 9928 है. इसी प्रकार से झारखंड में कुल मध्य विद्यालय 13664 है आरटीई के अनुरूप शिक्षक वाले स्कूल 2286 है. एक शिक्षक वाली विद्यालय 6904 है. वही छात्र शिक्षक अनुपात 40 से अधिक वाले स्कूल सिर्फ 13620 है. राज्य में वर्ष 2011 से शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू हो चुका है .इसके लागू होने के बाद भी अभी तक सभी स्कूल में यह व्यवस्था देखी नहीं जा रही है. ना तो उतना शिक्षक है और ना ही मानक के अनुसार उस प्रकार का संसाधन .विद्यालय में पीने के पानी का भी संकट है .शिक्षा का अधिकार अधिनियम में यह बताया गया है कि अगर किसी स्कूल में छात्र छात्राओं की संख्या 60 होती है तो कम से कम 2 शिक्षक चाहिए और अगर 200 से अधिक छात्र हैं तो प्रत्येक 40 छात्र के अनुपात में एक शिक्षक होना चाहिए.