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जहां एक और सदन के अंदर बीजेपी आजसू सत्ता पक्ष का विरोध कर रही है .हर मुद्दे पर उसे घेर रही है .वहीं दूसरी ओर बीजेपी के भानु प्रताप शाही ने लगातार कई दिन विधायकों मंत्रियों का वेतन बढ़ाने को लेकर मुद्दा उठाया. खास बात यह है कि इसमें सभी पार्टी की सहमति दिख रही है .वर्तमान में मुख्यमंत्री को मूल वेतन 80000 और allowances सहित ₹300000 दिया जाता है. अन्य मंत्री को मूल वेतन 65000 और भत्ता सहित 270000 दिया जाता है. स्पीकर को 78000 मूल वेतन और भत्ता सहित ₹298000 दिया जाता है. विपक्ष के नेता को मूल वेतन 65000 और भत्ता सहित ₹260000 .विधायकों को मूल वेतन 40000 भत्ता सहित ₹225000 दिया जाता है. मुख्य सचेतक को ₹55000 मूल वेतन ₹240000 भत्ता सहित दिया जाता है .उप मुख्य सचेतक को ₹50000 मूल वेतन और भत्ता सहित ₹235000 दिया जाता है. सचेतक को ₹40000 मूल वेतन और भत्ता सहित ₹225000 दिया जाता है. अब यह मांग किया गया है कि दिल्ली में जिस प्रकार से विधायक और मंत्री को सैलरी मिलती है वही सैलरी झारखंड में भी मिलना चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि वे इस मामले में देखेंगे और उचित कदम उठाएंगे. बजट सत्र के दौरान विधायक( भानु प्रताप शाही जो भारतीय जनता पार्टी के), विधायक समीर मोहंती जो जेएमएम के हैं और विधायक प्रदीप यादव जो कांग्रेस के हैं ने वेतन बढ़ाने की मांग की. गौरतलब है कि अंतिम वेतन वृद्धि 2017 में हुई थी allowances में क्षेत्रीय, अतिरिक्त, टेलीफोन भत्ता और यात्रा भत्ता दिया जाता है.