जमशेदपुर के पूर्वी विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद गालिब की लिखी यह पंक्तियां याद आ गई- दाग चेहरे पर थी और ताउम्र आईना साफ करता गया, जी हां यह पंक्तियां आज भी सटीक बैठ रही है

जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद मुख्यमंत्री अभी भी मानने को तैयार ही नहीं है कि उनकी हार उनके परिवार, उनका व्यक्तिगत अहंकार, व्यवहार और कुछ लोगों के द्वारा पार्टी को बदनाम कर देने के कारण हुई, ना की कार्यकर्ताओं की वजह से, हार को स्वीकार करना और सच को समझ लेना यह राजनीतिक गलियारों से लेकर सामाजिक सरोकार के क्षेत्र में भी अच्छा माना जाता है,

हार की समीक्षा बैठक के बाद कार्यकर्ताओं ने तो खुलकर पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को सारी स्थिति बता दी कि ग्राउंड लेवल में छवि कितनी खराब हो चुकी थी और लोग किस कदर क्षेत्र में परेशान थे, इसके बावजूद अभी भी पूर्व मुख्यमंत्री ने कभी भी इस पर विचार ना करते हुए पुरानी चीजों को दोहराया है कि उन्हें षड्यंत्र के द्वारा हराया गया जबकि सच तो यह है कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता एवं आर एस एस के कार्यकर्ता जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा में खुलकर सरयू राय के पक्ष में कार्य कर रहे थे

और इनका यह मानना था कि सरयू राय जी की ईमानदार छवि लोगों के बीच में लोकप्रियता और किसी भी प्रकार के विवादों से दूर रहना ही उनके जीत का कारण बनेगा और वही हुआ, भारत की चुनाव की एक और खासियत होती है

नेता के प्रति भावनात्मक लगाव हो जाना यही कारण है कि जैसे-जैसे सरयू राय जी का टिकट रोका जाता रहा वैसे वैसे लोग भावनात्मक रूप से उनसे जुड़ते चले गए, इस स्थिति को आप दूसरे प्रकार से भी देख सकते हैं कि सिर्फ 20 दिनों में एक निर्णय ले लेना कि चुनाव उस क्षेत्र से लड़ना है

जहां कि मुख्यमंत्री पिछले बार 70000 की मार्जिन से चुनाव जीते थे लेकिन सरयू राय ने इस निर्णय को लिया और देखते ही देखते एक बड़ा कारवां बनता चला गया सही मायने में अगर देखा जाए तो जमशेदपुर पूर्वी में मुख्यमंत्री लगभग 100000 वोट से चुनाव हार गए हैं क्योंकि पिछली बार के 70000 मार्जिन इस बार का लगभग 18000 वोट से पराजय और कांग्रेस एवं जेवीएम को मिला लगभग 27000 वोट यह सभी वोट मुख्यमंत्री के विरोध स्वरूप ही हासिल हुआ