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Jtet को लेकर 2026 में अंतिम नियमावली आ गई है .जिसमें अलग-अलग जिले में किस क्षेत्रीय भाषा को लिया जा सकता है और किस जनजातीय भाषा को लिया जा सकता है इसकी जानकारी दे दी गई है. जानकारी के मुताबिक रांची में जनजातीय भाषा के रूप में कुरुख, खड़िया, Mundari और भूमिज को लिया जा सकता है, क्षेत्रीय भाषा के रूप में नागपुरी पंचपड़गानिया कुरमाली और बंगला में से कोई एक लिया जा सकता है. लोहरदगा में जनजातीय भाषा कुरुख और क्षेत्रीय भाषा नागपुरी, गुमला में जनजातीय भाषा कुरुख और खड़िया क्षेत्रीय भाषा नागपुरी, सिमडेगा में जनजातीय भाषा खड़िया Mundari कुरुख क्षेत्रीय भाषा नागपुरी, पश्चिमी सिंहभूम में जनजातीय भाषा हो मुंडारी कुरुख संथाली क्षेत्रीय भाषा कुरमाली उड़िया,पूर्वी सिंहभूम जमशेदपुर में जनजातीय भाषा हो मुंडारी कुरुख संथाली bhumij, क्षेत्रीय भाषा कुरमाली उड़िया बांग्ला ,सरायकेला में हो मुंडारी संथाली bhumij एवं क्षेत्रीय भाषा पंचपरनिया उड़िया बांग्ला कुरमाली, लातेहार पलामू गढ़वा में जनजातीय भाषा कुरुख ,क्षेत्रीय भाषा नागपुरी रखा गया है .दुमका जामताड़ा साहिबगंज पाकुड़ और गोड्डा में संथाली भाषा जनजातीय भाषा के रूप में वही दुमका में खोरठा और बांग्ला ,जामताड़ा में भी उसी भाषा को क्षेत्रीय भाषा के रूप में साहिबगंज और पाकुड़ के साथ रखा गया है लेकिन गोड्डा में सिर्फ खोरठा को रखा गया है. हजारीबाग में क्षेत्रीय भाषा नागपुरी कुरमाली और खोरठा है,जबकि संथाली और कुरुख जनजातीय भाषा है कोडरमा में भी कुरमाली और खोरठा को क्षेत्रीय भाषा में मान्यता दिया गया है जनजातीय भाषा संथाली है.