
By abtaknews sw
तमिलनाडु के सरकार ने स्मार्ट ब्लैक बोर्ड योजना लागू किया है जाने विस्तार पूर्वक ?
तमिलनाडु के सरकार ने स्मार्ट ब्लैक बोर्ड योजना लागू किया है और इसको लागू करने का मुख्य उद्देश्य उनका यही है कि किस तरह से शिक्षण के माहौल में और बेहतर तरीके से सुधार लाया जा सके और इसे बढ़ावा देने के लिए अस्सी हजार सरकारी स्कूलों में स्मार्ट ब्लैकबोर्ड योजना लागू किया जा रहे हैं जिसमें ऑडियो विजुअल शिक्षण सामग्री के द्वारा बच्चों को रोचक ढंग से शिक्षित किया जाएगा। स्कूलों और कॉलेजों में डिजिटल तकनीक के माध्यम से पठन-पाठन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने अगले तीन वर्षों में देश के सभी स्कूलों कॉलेजों को डिजिटल ब्लैकबोर्ड से लैस करने की पहल बुधवार को शुरू की। इसे बढ़ावा देने के लिए कॉलेजों में डिजिटल तकनीक जैसे डिजिटल कक्षा और स्मार्ट कक्षा योजनाओं के साथ मिलाकर किया जा सकता है और यह स्मार्ट बोर्ड उन वस्तुओं का निर्माण करेगी जिन्हें पेनड्राइव का उपयोग करके कंप्यूटर स्क्रीन पर फीड किया जा सकता है। और यह योजना मानव संसाधन विकास मंत्रालय प्रकाश जावेङकर के द्वारा हमारे देश भारत में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए यह ऑपरेशन डिजिटल बोर्ड (ओडीबी) शुरू किया था। और यह अभियान तीन वर्षों में पूरा किया जाएगा और इस अभियान के बारे में बताया गया है वर्ष 2018 से 2019 के बजट में। यह अभियान स्कूल स्तर पर नौवीं कक्षा से 12वीं कक्षा और इसके आगे कॉलेज एवं विश्वविद्यालय स्तर पर बढ़ाया जाएगा।
इस पर तीन वर्षों से सात से दस हज़ार करोड़ रुपए का खर्च होने की अनुमान है इसके लिए बजटीय प्रावधान हो चुका है और यह अभियान करीब साठ साल पहले चलाए गए ब्लैकबोर्ड अभियान की तरह ही पूरे देश में चलेगा। केंद्रीय मंत्री के कहने के अनुसार राज्यों के साथ इसे आगे बढ़ाने को लेकर इस विषय में चर्चा की जा रही है और कई राज्य भी इसमें अपना योगदान करेंगे और इसके साथ ही सरकारी राज्य सरकार, और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों कॉलेजों को की जाएगी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ही है कि किस तरह डिजिटल और इंटरएक्टिव बोर्ड रखा जाए और इसके सहायता से इसे ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड की लाइन पर इसकी शुरुआत की गई।
ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड की शुरुआत सन 1987 में शुरू किया गया था और इस योजना का उद्देश्य था कि देश के सभी प्राथमिक स्कूलों में सभी न्यूनतम और महत्वपूर्ण सुविधाओं को उपलब्ध कराना। और इसका उदाहरण है जैसे कि ई पाठशाला, दीक्षा, नेशनल रिपोजिटरी ऑफ ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज ,और स्वयं प्रभा डीटीएच चैनल, नेशनल प्रोग्राम ऑन टेक्नोलॉजी इनहैन्समेनट लर्निंग, ईपीजी पाठशाला की शुरुआत की गई है जो पर्याप्त और उच्च गुणवत्ता वाले वस्तुएं को प्रदान करती हैं बच्चों को सीखने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं उनकी यह कक्षाएं घर पर ही उपलब्ध हो सकती हैं। शिक्षा मंत्रालय ने घर पर ही बच्चों को सभी तरह के सुलभ व्यवस्थाएं देने के लिए यह योजना की शुरुआत की जिससे डिजिटल शिक्षा में सुधार हो सके जैसे कि राजस्थान में लर्निंग मैनेजमेंट पहल के लिए सोशल मीडिया इंटरफेस, जम्मू कश्मीर में प्रोजेक्ट होम कक्षाएं, मेघालय में स्कॉलर पोर्टल, छत्तीसगढ़ में आपके द्वार पर शिक्षा या पढ़ाई पहल शुरू की गई थी। इस योजना के तहत देश में 1.5 लाख स्कूल सरकारी और निजी है और इनमें करीब सात लाख कक्षाएं हैं। वही कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर दो लाख कक्षाएं हैं और अगले तीन वर्षों में इनमे डिजिटल ब्लैकबोर्ड लगाया जाएगा।
देश में नौवीं से लेकर स्नातकोत्तर तक कि करीब नौ लाख कक्षाओं में अगले तीन साल के अंदर आम ब्लैक बोर्ड की जगह डिजिटल ब्लैकबोर्ड लगाए जाएंगे इसकी शुरुआत जुलाई से शुरू हुई नए अकादमिक वर्ष से कर दी जाएगी। इसमें से 60 फ़ीसदी राशि केंद्र सरकार देगी जबकि 40 फीसदी राशि राज्य को देनी होगी । स्कूलों में इस योजना का पैसा सभी शिक्षा अभियान से लिया जाएगा जबकि उच्च शिक्षा संस्थानों में डिजिटल ब्लैकबोर्ड की फंडिंग हीफा से कर्ज लेकर पूरी की जाएगी और इस ब्लैकबोर्ड के जरिए फिल्म व्याख्यान, शिक्षण गेम,आदि का इस्तेमाल कर विविध विषयों पर अवधारणा स्पष्ट की जाएगी। इसमें पाठ्य सामग्री भी शामिल होगी जिसमे छात्रों के संवाद के आधार पर शिक्षकों के जवाब भी उपलब्ध होंगे इस बारे में तकनीकी जरूरते दो-तीन महीने में पूरी कर ली जाएगी और पोर्टल पर पहले से ही दो हजार ई सामग्री उपलब्ध है।
देश में ऐसे डेढ़ लाख स्कूल है जिनमें यह योजना लागू किया जाएगा जैसे कि केंद्र सरकार के केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, कस्तूरबा बालिका विद्यालय, और राज्य सरकार के स्कूलों और नगर निगम एवं स्थानीय निकायों के स्कूलों में इस योजना को लागू किया जाएगा ।इस योजना को लागू करने का मुख्य उद्देश्य यही है क्योंकि हमारी दैनिक सुविधाएं की आवश्यकता बढ़ गई हैं इसी को ध्यान में रखते हुए ऑपरेशन डिजिटल ब्लैकबोर्ड का योजना चलाया जाएगा।
तमिलनाडु भारत के प्रसिद्ध राज्यों में से एक है। और यह एक प्रमुख राज्य हैं और यह देश के दक्षिणी हिस्से में स्थित है जबकि कर्नाटक और केरल एक साथ उत्तर पश्चिम और पश्चिम में स्थित है। जो दो जल संरचनाएं इस राज्य के पास है वे दक्षिण की और हिंद महासागर और पूर्व की ओर बंगाल की खाड़ी है । इसकी राजधानी चेन्नई है जिसे पहले मद्रास कहा जाता था और भारत का चौथा सबसे बड़ा शहर है और इसके मुख्य मंत्री हैं के पलानी स्वामी। इसके राज्यपाल है बनवारी लाल पुरोहित।इसका उच्च न्यायालय है मद्रास उच्च न्यायालय।इसका मुख्यपीठ है चेन्नई और खंडपीठ है मदुरै इसके मुख्य न्यायाधीश अमरेश्वर प्रताप शाही हैं। चेन्नई में इंटीग्रल कोच फैक्ट्री है। कांचीपुरम पल्लव वंश की राजधानी है और उटी इसका पर्यटन क्षेत्र है। और मदुरै मीनाक्षी मंदिर के लिए प्रसिद्ध है तंजावुर चोल वंश की राजधानी है और रामेश्वरम एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म स्थल है कन्याकुमारी मुख्य भूमि का दक्षिणतम छोर है। तिरुचिपल्ली यहां सबसे पुराना बांध है एनीकट बांध है जिसे चोल वंश के द्वारा बनवाया गया था।
इसका कुल क्षेत्र 175 वर्ग किलोमीटर है। तमिलनाडु में बहुत सारे सुंदर जगह है इसका सुंदर तटीय किनारा, सैकड़ों नारियल के पेड़, राजसी मंदिर, सांस्कृतिक विरासत और वन के जीव जंतु है । इसका इतिहास लगभग 6000 साल पुराना है और यह भी कहा जाता है कि द्रविड़ो की उत्पत्ति इसी स्थान से हुई है।इतिहासकार के अनुसार इसे तीन विशेष भागों में बांटा गया है प्राचीन ,मध्य और आधुनिक। इसकी सभ्यता पुरानी है और यही वजह है कि कुछ लोग कहते हैं कि द्रविड़ो को उत्तर में आर्यों के कारण दक्षिण में आना पड़ा। इसके राज्य में चोल पल्लव और पांडवों से लेकर कई राजवंशों ने शासन किया है। इसका गौरवशाली इतिहास प्राचीन और मध्य युग में बटा है। चौथी सदी मे कई सालों तक राज करने और उस समय के राजाओं से कई बार युद्ध और लड़ाई करने के बाद चोल राजाओं ने अपना शौर्य नौवीं सदी में वापस हासिल किया। और इसके बाद 14 वी सदी में मुस्लिम शासकों ने कई हमलों के बाद दक्षिण भारत के प्रमुख हिस्सों पर कब्जा कर लिया।
तमिलनाडु की सरकार बहुत ही सक्रिय है और यह राज्य मुख्यमंत्री द्वारा राज्यपाल और अन्य मंत्रियों के साथ मिलकर चलाया जाता है ।इसके राज्य में लगभग सभी राष्ट्रीय दल मजबूत है और इसके राज्य के अंदर कई क्षेत्रीय पार्टियों ने राजनीतिक मामले को सुचारू रूप से चलाने में अपनी भूमिका निभाई है तमिलनाडु में 234 विधानसभा क्षेत्र और 40 लोकसभा क्षेत्र हैं यह राज्य देश की केंद्रीय राजनीति पर भी असर डालता है और यह देश के लिए कई मामलों में जीवंत और विविध उदाहरण हैं।इसका राज्य जमीन से घिरा हुआ है जिसका कारण है उत्तर दिशा में कर्नाटक और आंध्र प्रदेश और पश्चिम में केरल से घिरा होना। इसके दक्षिण में हिंद महासागर और पूर्व में बंगाल की खाड़ी है। इसकी उत्तरी छोर पर पुलीकट झील और दक्षिणी छोर पर कन्याकुमारी या केप कोमोरिन है तमिलनाडु के पूर्वी छोर पर पॉइंट केलेमर और इसके पश्चिमी के अंत पर मुदुमलाई वन्यजीव अभ्यारण्य है । इसके पूर्वी घाट और पश्चिमी घाट की पर्वत श्रृंखलाएं सीमाओं के साथ-साथ चलती हुई नीलगिरी की पहाड़ियों में मिलती हैं। इसके राज्य के भूगोल बनाने में तीन खास क्षेत्र अपना योगदान करती हैं जो है पहाड़ी क्षेत्र या कुरिंजी, शुष्क क्षेत्र या पलाई, और वन क्षेत्र या मुलाई, तटीय क्षेत्र या नैधाल और उपजाऊ मैदान या मुरूधम। कर्नाटक राज्य से निकलती कावेरी नदी तमिलनाडु में आकर यहां की जीवनरेखा बन जाती हैं। कोरोमंडल मैदानों को उपजाऊ और हरा बनाने और तंजावुर और नागापट्टियम में डेल्टा के निर्माण का श्रेय इस नदी को जाता है।
यदि मौसम के बारे में बताया जाए तो यह राज्य मानसून की बारिश पर निर्भर करता है और कभी कभी बारिश ना होने के कारण यहां पर सूखा होने की स्थिति भी पैदा हो जाती है। जून से सितंबर महीने तक दक्षिण पश्चिम मानसून के साथ तेज दक्षिण-पश्चिम हवाओं का, अक्टूबर से दिसंबर तक उत्तर-पूर्वी मानसून का जिसमे उत्तर पूर्वी हवाएं चलती हैं और जनवरी से मई तक शुष्क मौसम का इसके राज्य में बरसात के तीन समय होते हैं। इसके राज्य में बारिश का वार्षिक औसत 945 मिलीमीटर है जिसमें से 32 प्रतिशत दक्षिण पश्चिम मानसून से और 48 प्रतिशत उत्तर-पूर्वी मानसून से आता है इस राज्य को सात कृषि मौसमी भागों में बांटा गया है उत्तर पश्चिम, उत्तर पूर्व, दक्षिण, पश्चिम, पहाड़ की ऊंचाई, भारी वर्षा और कावेरी डेल्टा।
तमिल समाज में हिंदुओं की संख्या अधिक है और उसमें से अधिक कट्टर ब्राह्मण है उनकी अपनी धार्मिक और सामाजिक मान्यताएं हैं और यहां के हिंदुओं में आधुनिक और मध्य युग के हिंदू धर्म का एक अच्छा मिश्रण देखने को मिलता है और इसके अलावा मुस्लिम और ईसाई की आबादी का अनुपात ठीक है लेकिन हिंदुओं की तुलना में काफी कम है । और कुछ लोग जैसे की बौद्ध , सीख और दूसरे धर्म के लोग तमिल समाज का हिस्सा है। इसके राज्य के साहित्य और वास्तुकला में तमिल जैनों ने बहुत बड़ा योगदान दिया है। इसके राज्य में कई ऐसे लोग भी रहते हैं जो कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति होकर भी स्वयं को हिंदू बताते हैं जनगणना की माने तो वह लोगों को हिंदू की आबादी में शामिल नहीं किया गया है।
तमिलनाडु की संस्कृति समाज और कला काफी प्रसिद्ध है और यहां के लोग बहुत ही आरामदायक जीवन शैली जीते हैं और उन लोगों की रूचि संगीत, नृत्य ,और साहित्य में है। यहां वर्षों से भरतनाट्यम जैसे कई प्रकार के संगीत जिसमें कि कर्नाटक संगीत भी मौजूद है इस तरह की संगीत का काफी विकास हुआ है जो कि यहां के लोगों की रोजाना जिंदगी का मुख्य हिस्सा है। गायक और कवि त्यागराज के जन्म स्थान थिरूवरियर में हर साल जनवरी में कर्नाटक संगीत का एक अनूठा उत्सव भी आयोजित होता है। यहां के हस्तशिप में लकड़ी, पत्थर और धातु की नक्काशी शामिल है। सबसे सुंदर और बेहतर नक्काशीदार कांस्य और तंजोर की थाली के बारे में भी उल्लेख किया गया है।
यदि हम तमिलनाडु की भाषा के बारे में बताएं तो तमिल यहां की सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषा है और इसके अलावा कुछ लोग दूसरे दक्षिण भारतीय भाषाएं भी बोलते हैं जैसे कि तेलुगू , कन्नड़ और मलयालम भाषा शामिल है। इसकी विविधता और विकसित औद्योगिकरण एवं तरक्की की वजह से देश के कई लोग यहां पर आकर रहना पसंद करते हैं। इसलिए गैर दक्षिण भारतीय भाषाएं जैसे हिंदी, गुजराती, पंजाबी, भोजपुरी और मराठी भाषा भी लोगों के द्वारा बोली जाती है।
और यहां का त्यौहार बहुत ही लोकप्रिय है पूरे वर्ष होने वाले मेले और त्यौहार बहुत मायने रखते हैं, और दुनिया भर से लाखों लोग इन्हें देखने आते हैं राज्य में सभी मेले और त्यौहार बहुत ही धूमधाम और उत्साह से मनाया जाता है।
इसके राज्य में द्रविड़ संस्कृति की शुरुआत हुई थी। और साथ ही राज्य के मंदिर और स्मारक द्रविड़ वास्तुकला का सबसे अच्छा उदाहरण है यह राज्य भारत के संगीत कला और साहित्य में अपनी अहम भूमिका निभाई है और भरतनाट्यम जो कि भारत का सबसे मशहूर और लोकप्रिय नृत्य है जिसकी उत्पत्ति यहीं से हुई है। इसकी साक्षरता दर सभी राज्यों में से सबसे अधिक है और इसके साथ ही इसके राज्य में ऐसे हजारों स्कूल है जो सीबीएसई ,आईसीएसई, या तमिलनाडु राज्य बोर्ड से संबंधित है और इन स्कूलों की देखभाल सरकार और निजी संस्थाएं द्वारा की जाती है इसके जरिए यहां के बच्चों को सबसे अच्छे बुनियादी शिक्षा मिल सके यही यहां की सरकार का प्रयास रहता है। सरकार ने गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले बच्चों को कई सुविधाएं उपलब्ध कराई है दोपहर का भोजन, कंप्यूटर की शिक्षा मुफ्त यात्रा, छात्रों के लिए मुफ्त किताबें, और यूनिफॉर्म जैसी कई सुविधाएं उपलब्ध है। इसके अलावा 480 इंजीनियरिंग कॉलेज, 5000 मेडिकल कॉलेज, 1100 आर्ट कॉलेज भी हैं। डिप्लोमा, डिग्री ,पीजी और रिसर्च जैसे कई प्रकार के कोर्स टीएनडीटीई छात्रों के लिए उपलब्ध कराई जाती है। तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था भी काफी विकसित है यहाँ के विकसित उद्योग ,कृषि क्षेत्र ,बैंकों और वित्तीय संस्थाओं सभी एक साथ मिलकर राज्य की आर्थिक वृद्धि में मदद करती हैं। यह ऐसा राज्य है जहां पावर और ऊर्जा के आरक्षण के कारण बिजली उत्पादन सरप्लस है। इसके अलावा यहां के संचार भी बहुत विकसित है।
यहां पर कई ऐसे पर्यटन स्थल है जो लोगो को अपनी और आकर्षित करती है प्राकृतिक सौंदर्य जैसे खूबसूरत समुद्र तट, राजसी मंदिर, कई ऐतिहासिक स्मारक, मन को लुभाने वाले झरने और मनोरम नजारे देखने को मिलती है जिसकी वजह से लोग यहां पर घूमने आते हैं। सिल्क साड़ियों का कारोबार यहां पर अच्छा होता है। लोगों को भारतीय प्रायद्वीप के छोर में स्थित कन्याकुमारी में बंगाल की खाड़ी, अरब सागर और हिंद महासागर का संगम देखना भी बहुत पसंद है ।यहां के सुंदर मरीना बीच जिसकी लंबाई लगभग 12 किलोमीटर है और यह विश्व का सबसे लंबा बीच है और इसके साथ ही कोवलोग बीच भी मशहूर है
परिवहन के मामले में भी इसने काफी सुधार किया है यह पब्लिक और निजी वाहनों के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध कराता है। इसके सरकार द्वारा राज्य और ग्रामीण सड़कों के सघन और व्यापक नेटवर्क को व्यवस्थित किया जाता है यह दक्षिण रेलवे राज्य को बाकी देश से जोड़ने का काम करती है इसके अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट देश और विदेश की प्रमुख एयरलाइंस के लिए हब है। इसके शहर के यात्री राज्य परिवहन निगम की कई रूटों पर चलने वाले बसों के जरिए एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं और इसके साथ ही यहां की सरकार ने टैक्सी ,ऑटो रिक्शा, साइकिल रिक्शा, और निजी कारें जैसी हर सुविधा यहां के लोगों को उपलब्ध कराई है जो लोगों को एक जगह से दूसरी जगह जाने में मदद करती है।
