झारखंड की स्थानीय नीति को लेकर शुरू से ही विवाद होता रहा है हालाकी रघुवर कि सरकार द्वारा 7 अप्रैल 2016 को स्थानीय नीति घोषित की गई थी परंतु वर्तमान सरकार हेमंत सरकार इस नीति में त्रुटि बताते हुए इसे खारिज कर दिया है परंतु अब फिर से एक बार यह स्थानीय नीति एजेंडा बन गया है। यहां से मैट्रिक पास करने वालों को स्थानीय बताया जा रहा है । उस नीति में त्रुटि थी जिस वजह से हेमंत सरकार द्वारा इस नीति को खारिज कर दिया गया है, इस पर कोई भी राजनीति ना हो एवं एक स्पष्ट नीति बनाया जाए।

परंतु विधानसभा में राज्य की जनता का इस नीति को लेकर इस दल की क्या राय है? इस पर विधानसभा में बहस होनी चाहिए। बहस के बाद ही यह मामला पूरी तरह से साफ होगा । सरकार आदिवासी मूलवासी को हक देना चाहती है तो जल्द ही इसके इसे लेकर उसे पहल करनी चाहिए। 2013 में भी हेमंत सरकार बनने के बाद भी स्थानीय नीति के लिए कमेटी बनाई गई थी परंतु ड्राफ्ट तैयार होने के बाद भी यह नीति नहीं बनाई जा सकी थी।