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झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार को पत्र लिखा है और इसमें कहा है कि आदिवासी समुदाय के धार्मिक अस्तित्व की रक्षा के लिए सकारात्मक निर्णय लेने हेतु जातीय जनगणना में सरना धर्म कोड का अलग कॉलम देना चाहिए. उन्होंने बताया कि बस 2011 की जनगणना में अलग कोड न होने के बावजूद राज्य के लगभग 50 लाख लोगों ने धर्म के कॉलम में स्वप्रेरणा से सरना अंकित करवाया था. वहीं राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कहा कि आदिवासी समाज की भावना झारखंड की आकांक्षा को लेकर के द्वितीय चरण की जनगणना में सरना धर्म व अन्य सदस्य धार्मिक व्यवस्था के अलग को रखने क हेमंत सोरेन सरकार ने 11 नवंबर 2020 को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर सरना को जनगणना में शामिल करने का प्रस्ताव पारित किया था. सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष ने भी प्रस्ताव का पूरा समर्थन किया था. विधानसभा से पारित होने के बाद सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और स्टाफ जनरल ऑफ इंडिया को मंजूरी के लिए भेज दिया था. फिर मुख्यमंत्री ने दिल्ली जाकर कई बार केंद्रीय मंत्री से मुलाकात की. इस पर जल्दी फैसला लेने का आग्रह किया. विधानसभा से पास होने के बाद राजकीय आदिवासी संगठन में उम्मीद जगी. उन्होंने दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन भी किया. देश भर के आदिवासी समुदाय को एकजुट करने की शुरुआत हुई .प्रस्ताव पास हुए 5 साल से ज्यादा समय हो चुका है लेकिन केंद्र के पास अभी भी लंबित पड़ा हुआ है .क्योंकि फिर से जनगणना के काम शुरू हुआ इसलिए मुख्यमंत्री ने इसे फिर से जोर-जोर से उठाया है.