ईमानदार व्यक्तित्व से जीते सरयू राय भाजपा के गढ़ को मजबूत करने वाले राज्य के मुख्यमंत्री को उनके अपने ही क्षेत्र में उनके ही बाघी नेता ने उन्हें शिकस्त दी। जिनका उस क्षेत्र के जन प्रतिनिधि के तौर पर कोई भी आधार नहीं था इसके कई कारण सामने आए हैं।

इसमें सबसे बड़ा कारण है मालिकाना हक की बात करना पर बुलडोजर चलाने से एक अविश्वास का माहौल बना रहना । जिस वादे के कारण उन्हें पिछले 25 सालों से भरपूर प्यार मिला पर बिरसानगर के दर्जनों घर पर उन्होंने बुलडोजर चलवाया, जो उनके खिलाफ एक मुहिम बनता चला गया ।

जिससे सबसे बड़े वोट बैंक बिरसा नगर के लोगों में डर पैदा कर दिया क्योंकि 40- 50 वर्षों से रह रहे लोगों को यह भय हो गया था कि कहीं उनका मकान भी ना तो दिया जाये।दूसरा ऐन मौके पर सरयू राय का टिकट काट देना एवं उनके द्वारा पूर्वी से चुनाव लड़ने की घोषणा करना लोगों में एक जोश जगा दिया और लोग सरयू राय को जिताने के लिए काम करने लगे।

इसमें वैसे भी कई लोग उभर कर सामने आए जो भाजपा के तो थे लेकिन वर्षों से रघुवर के खिलाफ ही काम करते थे लोग सरयू राय के समर्थन में आ गए एवं पार्टी की तरह बूथ स्तर पर महज 20 दिनों में पहुंच गया और चुनाव की तैयारियां भी कर ली। मतदान के पूर्व ही जीत की ओर बढ़ता चला गया और अंत में यही फैक्टर सरयू राय को विजई बनाने में काम आया और लोगों ने वोट के रूप में उन्हें अपना नेता चुन लिया।