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झारखंड में 26000 सहायक आचार्य की नियुक्ति परीक्षा होने का नाम ही नहीं ले रही है. हाल ही में हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है हाई कोर्ट ने पूर्व में कहा था की जो स्टूडेंट सीटेट पास है एवं पड़ोसी राज्य के स्टूडेंट वहां का टेट परीक्षा पास किए हैं उन्हें भी सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में शामिल करना चाहिए .इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट चला गया जहां jtet उत्तीर्ण स्टूडेंट ने आवेदन देकर कहा कि इसमें सीटेट वाले को मान्यता देना गलत है .jtet उत्तीर्ण स्टूडेंट की ओर से रखते हुए अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने कहा की jtet परीक्षा में स्थानीय भाषा भी रहता है, जो सीटेट में नहीं है इसलिए सीटेट पास करने वाले झारखंड के अभ्यर्थी स्कूल में ठीक से नहीं शिक्षा दे पाएंगे .इस तरह का नीतिगत निर्णय झारखंड हाई कोर्ट नहीं ले सकती है. फैसला गलत है ,झारखंड के क्षेत्रीय व जनजातीय भाषा संथाली, खोरठा ,नागपुरी ,हो ,कुरमाली आदि का ज्ञान jtet अभ्यर्थी के पास है क्योंकि उन्होंने इसकी परीक्षा दी है और उत्तीर्ण हुए हैं लेकिन सीटेट के पास क्षेत्रीय भाषा के रूप में हिंदी या अंग्रेजी का ही ज्ञान है .अब हाईकोर्ट ने उन्हें सहायक आचार्य परीक्षा में शामिल होने को कहा है तो इससे संशय की स्थिति बनती है .सुप्रीम कोर्ट ने एक महीने के बाद इस पर दूसरी सुनवाई करने के लिए बुलाया है.