क्षेत्रीय भाषा के शिक्षकों का अस्तित्व मिटाने में तुले हैं कुछ लोग, लाखों का लगाया चूना. Nitusingh abtaknews.live
झारखंड के सभी परीक्षा में क्षेत्रीय भाषा एवं जनजातीय भाषा को अनिवार्य कर दिया गया है जाहिर सी चीज है कि सरकार की योजना इस विषय में लोगों को रोजगार देने की है लेकिन इन दिनों जो टीचर क्षेत्रीय भाषा और जनजातीय भाषा को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं ,उनके ही रोजगार पर संकट खड़ा हो जा रहा है. इसका मूल कारण वैसे लोग हैं जो टीचर से नोट्स खरीदकर मात्र 10, ₹20 में ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध करवा दे रहे हैं. आपने पहले मूवी की copy सुनी होगी और इसके लिए कई बार छापेमारी भी होता है .क्षेत्रीय भाषा और जनजातीय भाषाओं से जुड़े हुए लेखक और शिक्षक की भी यही दिक्कत है कि इस समय रांची एवं अन्य शहर के बीच चौक चौराहे में ही धड़ल्ले से जेरोक्स कॉपी एक ₹100 में बेची जा रही है .इतना ही नहीं किताब का डिजिटल फॉर्म में सिर्फ ₹10 और ₹20 में ही उपलब्ध करवा दिया जा रहा है. इसके लिए बकायदा Ranchi के कुछ गैंग कार्य कर रहे हैं और टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से इस कार्य में लगे 11 टेलीग्राम ग्रुप में लगभग 4000 से 5000 स्टूडेंट जुड़े हुए हैं .आप जरा सोचिए कि आप को फ्री का कोई किताब मिल जाता है और 5000 लोगों से आप 20-20 रुपया भी उठा लेते हैं तो जो लोग इसे गलत तरीके से उपलब्ध करवा रहे उनकी तो चांदी ही चांदी है लेकिन इसके मूल लेखक को प्रकाशन को एवं इससे जुड़े हुए शिक्षक शिक्षिकाओं को भारी नुकसान हो रहा है ,यही कारण है कि इन दिनों शिक्षक शिक्षिकाओं ने अब तक न्यूज़ संवाददाता से बातचीत करते हुए कहा कि जल्द ही इस मामले को लेकर कोर्ट की शरण में जाएंगे और बौद्धिक संपदा कानून एवं कॉपीराइट कानून के तहत सभी लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा. अगर इस कार्य में लगे हुए लोग जल्दी अपने काम को बंद नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी.