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व्यर्थ से अर्थ पर मंथन (Conclave on Waste to Wealth)
मानव संसाधन विकास संस्थान द्वारा 18 जनवरी 2025 को रांची के होटल चाणक्य बीएनआर में कॉर्पोरेट-रीसाइक्लर्स कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के संयोजक प्रोफेसर रंजीत प्रसाद ने बताया कि यह कार्यक्रम “व्यर्थ से अर्थ” थीम पर आधारित था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य धातु निर्माण उद्योगों, रीसाइक्लर्स, अनुसंधान प्रयोगशालाओं और शिक्षाविदों को एक मंच पर लाना था ताकि उत्पन्न कचरे के उपयोग में उद्योगों के सामने आने वाली तत्काल चुनौतियों के समाधान पर विचार-मंथन सत्र आयोजित किया जा सके। सेल के बीएसएल के प्रभारी निदेशक श्री बी. के. तिवारी ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। उन्होंने अपशिष्ट प्रबंधन के स्थायी समाधान के लिए उद्योगों के सहयोगी दृष्टिकोण के महत्व पर जोर दिया। इसके अलावा, उन्होंने राष्ट्र के विकास के लिए सर्कुलर इकोनॉमी के पांच तत्वों यानी 5आर (रिफ्यूज, रिड्यूस, रीसाइकिल, रीयूज और रीमैन्युफैक्चर) पर चर्चा की इस विचार-मंथन सत्र में हिंडाल्को, एएमएनएस, जेएसडब्ल्यू, जेएसपीएल, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाटा स्टील, बायोटेक एग्रीइनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड, इकोसस्टेन ने भाग लिया। इस सम्मेलन में शैक्षणिक और केंद्र द्वारा वित्तपोषित अनुसंधान संस्थानों के प्रतिभागियों ने भी भाग लिया। इन संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपशिष्ट प्रबंधन के लिए अपने उद्योगों में अपनाई जाने वाली सर्वोत्तम प्रथाओं के बारे में चर्चा की। प्रो. (सेवानिवृत्त) रंजीत प्रसाद, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जमशेदपुर और संयोजक, सीआरसी 2025 ने उद्योगों से उत्पन्न होने वाले कचरे से मूल्यवान संसाधन बनाने के बारे में बात की। इस कार्यक्रम के सह-संयोजक डॉ. एस. रंगनाथन भारत सरकार के पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के उद्योग-1 के विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति के सदस्य हैं। उन्होंने उद्योगों से उत्पन्न कचरे के उपयोग के लिए प्रौद्योगिकियों के विकास की समय की मांग पर ध्यान केंद्रित किया। आयोजन सचिव डॉ. सुरुचि कुमारी ने नई पीढ़ी के अपशिष्ट अर्थात ई-कचरे पर बात की, जिस क्षेत्र पर बड़े पैमाने पर काम करने की आवश्यकता है और सम्मेलन के अंत में धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील के मुख्य स्थायित्व अधिकारी डॉ. अरविंद बंधनकर ने बताया कि एएमएनएस में लगभग 47 विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट उत्पन्न होते हैं और ऐसे 37 अपशिष्टों के लिए समाधान पहले ही विकसित किया जा चुका है।
सीएसआईआर-एनएमएल जमशेदपुर के डॉ. संजय कुमार ने सर्कुलर इकोनॉमी के माध्यम से ‘कचरे से नकदी तक’ विषय पर अपना व्याख्यान दिया, उन्होंने भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की अपशिष्ट प्रबंधन प्रौद्योगिकी समिति के बारे में भी बात की। यह समिति अपशिष्ट उपयोग के लिए प्रौद्योगिकी विकास और कार्यान्वयन का समर्थन करती है। उन्होंने रेड मड यूटिलाइजेशन, ई-वेस्ट और बैटरी उपयोग के लिए सीएसआईआर-एनएमएल में उपलब्ध विभिन्न तकनीकों के बारे में बात की।
श्री नितेश रंजन, सेल बोकारो स्टील प्लांट ने भारतीय लौह एवं इस्पात उद्योगों के लिए एलडी/एसएमएस स्लैग के उपयोग को एक चुनौती के रूप में बताया। प्लांट ने अपने एलडी स्लैग उपयोग को इसके प्रसंस्करण और फ्लक्स प्रतिस्थापन के रूप में आंतरिक प्रक्रिया में उपयोग के माध्यम से बढ़ाया है। एलपी स्लैग का उपयोग फ्लाई-ऐश एलडी स्ले ब्रिक और पेवर ब्लॉक निर्माण के साथ-साथ सड़क और सीमेंट निर्माण के लिए भी किया जा रहा है। सेल/बोकारो स्टील प्लांट ने शीतलक के रूप में स्लज के उपयोग की खोज की है। संगठन के कार्बन पदचिह्न को कम करने में सर्कुलर इकॉनमी और सामग्री दक्षता मददगार साबित हुई है।
डॉ अमित रंजन चक्रवर्ती, मुख्य पर्यावरण विकास और श्री अखिलेश कुमार मिश्रा, मुख्य परिचालन और एनआई, आईबीएमडी, टाटा स्टील ने बताया कि टाटा स्टील ने भारत में इस्पात निर्माण के कई पहलुओं में अग्रणी भूमिका निभाई है, जिसमें कोयला, अयस्क, बीएफ स्लैग, स्टील स्लैग, मेटालिक्स और अन्य अपशिष्ट सहित इस्पात संयंत्रों के उप-उत्पाद शामिल हैं। औद्योगिक उप-उत्पाद प्रबंधन प्रभाग को लाभ केंद्र के रूप में बनाया गया है, जो वर्तमान में मात्रा के हिसाब से 17 मीट्रिक टन उप-उत्पादों को संभाल रहा है और प्रति वर्ष 8000 से 10000 करोड़ रुपये का राजस्व उत्पन्न कर रहा है। उन्होंने टाटा एग्रेटो, टाटा निर्माण, टाटा ड्यूरेको और टाटा फेरो-शॉट नाम से चार ब्रांडेड उत्पाद भी बनाए हैं और कई और स्थापना की प्रक्रिया में हैं। चूंकि टाटा स्टील को अगले दशक में अपने उत्पादन में दो गुना वृद्धि की उम्मीद है, इसलिए उप-उत्पादों की मात्रा भी दोगुनी होने जा रही है
हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के विवेक कुमार ने अपशिष्ट प्रबंधन के लिए जैविक प्रक्रियाओं के उपयोग पर बात की। साथ ही उन्होंने कहा कि उनका संगठन पर्यावरण संबंधी खतरों को कम करने के लिए वृक्षारोपण और पुनर्चक्रण प्रयासों के माध्यम से पुनर्वास पर ध्यान केंद्रित करता है।
विभिन्न संस्थानों के अन्य लोगों ने औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन पर अपने विचार साझा किए। साथ ही विचार-विमर्श सत्र में भी भाग लिया, जहां सभी ने चुनौतियों और समाधान के बारे में चर्चा की, तथा टिकाऊ उद्योगों की ओर कैसे आगे बढ़ा जाए, इस पर चर्चा की।