वैशाली jharkhand aajtak in
गुरु रविदास जयंती के अवसर पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की गई है।इन तीनों राज्यों में सरकारी संस्थान, स्कूल, कॉलेज और बैंक बंद रहेंगे। 15वीं शताब्दी के महान संतों में से एक रहे रविदास जी द्वारा लिखित दोहे आज भी लोगों की जुबान पर हैं। चौदस सो तैंसीस कि माघ सुदी पन्दरास. दुखियों के कल्याण हित प्रगटे श्री गुरु रविदास
इस दोहे में कहा गया है कि माघ माह की पूर्णिमा तिथि के दिन संत रविदास का जन्म हुआ था। इसलिए हर साल इसी तिथि पर गुरु रविदास जयंती मनाई जाती है।
ऐसे में इस साल माघ पूर्णिमा यानी बुधवार, 12 फरवरी, 2025 को गुरु रविदास जी की जयंती मनाई जाएगी।12 फरवरी को रविदास जयंती के अवसर पर स्कूल, सरकारी कार्यालय, बैंक और मांस-शराब की दुकानें बंद रहेंगी. इस दिन को सार्वजनिक अवकाश के रूप में मनाने का फैसला सरकार द्वारा लिया गया है।
हर साल गुरु रविदास जयंती को बडे़ ही उत्साह के साथ मनाया जाता है।इस दिन का रविदासिया धर्म के लिए विशेष महत्व होता है. भारत में गुरु रविदास जी की जयंती के इस महत्वपूर्ण अवसर को मनाने के लिए विभिन्न देशों से श्रद्धालु आते हैं और भक्तगण पवित्र नदियों या संगम में स्नान कर अनुष्ठान करते हैं. रविदास जी का पूरा जीवन भक्ति व ज्ञान के लिए समर्पित रहा। समाज की उन्नति के लिए किया गया उनका योगदान आज भी सहायनीय है। उन्होंने समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
आइए जानते हैं इनके बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें –
संत रविदास के जन्म को लेकर कई मत हैं, जिसमें से सबसे प्रचलित मत यह है कि रविदास जी का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक मोची परिवार में हुआ था।रविदास जी का 15वीं शताब्दी में भक्ति आंदोलन में बड़ा योगदान रहा। यह उस समय का एक बड़ा आध्यात्मिक आंदोलन था, जिसने भक्ति का प्रचार करने के साथ-साथ समाज सुधार का भी काम किया। उन्होंने अपने जीवन में कई गीत, दोहे और भजनों की रचना की, जो आज के समय में भी मानव को प्रेरित करने का काम कर रहे हैं।
उनकी रचनाओं में आत्मनिर्भरता और एकता का संदेश मिलता है। इन्होंने अपनी रचनाओं में समाज से जातिवाद, भेदभाव और समाजिक असमानता के भाव को हटाकर भाईचारे और सहिष्णुता का भाव अपनाने के संदेश दिया, जिसका उस समय के लोगों पर काफी सकारात्मक असर पड़ा था। इसी के साथ गुरु रविदास जी ने शिक्षा के विशेष जोर दिया। विख्यात संत मीराबाई भी रविदास जी को ही अपना गुरु मानती थीं।गुरु रविदास जी को केवल हिंदू धर्म के लोगों ही नहीं मानते है, बल्कि सिख धर्म के लोग भी इनके प्रति श्रद्धा भाव रखते हैं। रविदास जी की 41 कविताओं को सिखों के पवित्र ग्रंथ, गुरुग्रंथ साहिब में स्थान मिला हुआ है।
गुरु रविदास जयंती एक वैकल्पिक अवकाश है। भारत में रोजगार और अवकाश कानून कर्मचारियों को वैकल्पिक छुट्टियों की सूची में से सीमित संख्या में छुट्टियां चुनने की अनुमति देते हैं। कुछ कर्मचारी इस दिन छुट्टी लेना चुन सकते हैं, हालांकि, अधिकांश कार्यालय और व्यवसाय खुले रहते है
दिल्ली में रविदास जयंती को पर्व की तरह मनाया जाता है।दिल्ली उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने सोमवार को एक आदेश जारी कर 12 फरवरी को सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है. सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि बुधवार 12 फरवरी को गुरु रविदास जयंती के अवसर पर दिल्ली सरकार के सभी सरकारी कार्यालयों, स्वायत्त निकायों और सार्वजनिक उपक्रमों में अवकाश रहेगा. नए आदेश के अनुसार नवंबर 2024 में गुरु रविदास जयंती के अवसर पर घोषित प्रतिबंधित अवकाश को रद्द कर दिया गया है. अवकाश को लेकर एलजी के आदेश का असर केवल सरकारी दफ्तरों और सार्वजनिक उपक्रमों तक सीमित है. निजी कंपनियों, स्कूलों और अन्य संस्थानों के लिए इसे लागू करना अनिवार्य नहीं है.