हैदराबाद को हाल ही में आई एम डी द्वारा जारी स्मार्ट सिटी इंडेक्स 2020 में सबसे ऊंचा स्थान मिला है। स्मार्ट सिटी सूचकांक में हैदराबाद का स्थान 85 वा नई दिल्ली को 86 वा स्थान मिला है। इस सूची में मुंबई 2019 के 78 वा स्थान से फिसल कर कर 2020 में 93 वे स्थान पर आ गया है जबकि बेंगलुरु को 95 वा स्थान मिला है। शहरों जैसे नई दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद ,बेंगलुरु को इस साल गिरावट का सामना करना पड़ सकता है, इसकी वजह यह हो सकती है कि जहां तकनीकी विकास नहीं हुआ है वही महामारी का प्रभाव ज्यादा रहा है, क्योंकि शहर के लोग इसके लिए तैयार नहीं थे उन्हें वायु प्रदूषण जैसे समस्या का भी दिक्कत हो रहा है। इस साल की रैंकिंग में यह बताया गया है कि अलग-अलग शहरों में टेक्नोलॉजी के विकास को लेकर अलग-अलग विचारधाराएं हैं, क्योंकि महामारी से निपटना सबके लिए बड़ी समस्या हो गई है। आईएमडी के प्रोफेसर का कहना है कि कोरोना के प्रभाव को तो हम नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं लेकिन तकनीकी विकास ऐसे संकट से निपटने में ज्यादा मदद करता है। तकनीकी विकास का भी होना बहुत जरूरी है स्मार्ट सिटी इंडेक्स में शहरीकरण की कमियों को कम करने के लिए तकनीकी विकास के आधार पर स्थान दी जाती है इसमें अलग-अलग क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य ,सुरक्षा, शासन आदि को लेकर उनकी शहर की टेक्नोलॉजी के विकास के बारे में सवाल पूछे गए हैं। इसके अलावा शिर्ष 10 शहरों में स्थान पाने वालों में
ऑकलैंड चौथा स्थान, ओस्लो पांचवा स्थान, कोपनहेगन छठा स्थान, जिनेवा सातवां स्थान, ताइपे शहर आठवां स्थान एमस्टरडम नवा, और न्यूयॉर्क दसवें स्थान पर रहा है। आधुनिक सुविधाओं के विकास के प्रौद्योगिकी का कितना इस्तेमाल किया तथा इसके जरिए उसने शहरीकरण की कमियों को दूर करने में किस
स्तर की कोशिश की। रैंकिंग में दुनिया भर के 109 सर शामिल रहे हैं। हर शहर के 120 लोगों से राय ली गई इस साल अप्रैल और मई में किए गए सर्वे में लोगों से उनके शहरों के पाच क्षेत्रों स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, परिवहन गतिविधियां अवसर तथा प्रशासन ने प्रौद्योगिकी के प्रयोग पर सवाल पूछे गए। स्मार्ट सिटी उनकी सबसे अहम जरूरतों एवं जीवन में सुधार करने के लिए सबसे बड़े अवसरों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। बदलाव के लिए दृष्टिकोण की श्रृंखला अपनाई जाती है डिजिटल और सूचना प्रौद्योगिकी, शहरी योजनाओं की सर्वोत्तम प्रथाओं सार्वजनिक निजी साझेदारी ,और नीति मे बदलाव हमेशा लोगों को प्राथमिकता दी जाती है। स्मार्ट सिटी मिशन के दृष्टिकोण में उद्देश्य ऐसे शहरों को बढ़ावा देना है जो बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराएं और अपने नागरिकों को एक सभ्य गुणवंता पूर्ण जीवन प्रदान करें।
एक स्वच्छ और दर कदम विकास क्षेत्र के आधार पर प्रगति के तीन मॉडल रिट्रोफिटिंग पुनर्विकास हरित क्षेत्र पर्याप्त पानी की आपूर्ति, निश्चित विद्युत आपूर्ति ,ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सहित स्वच्छता कुशल शहरी गतिशीलता और सार्वजनिक परिवहन की किफायती आवास विशेष रूप से गरीबों के लिए सुनिश्चित आईटी कनेक्टिविटी और डिजिटलीकरण सुशासन, विशेष रूप से ई गवर्नेंस और नागरिक भागीदारी टिकाऊ पर्यावरण नागरिकों की सुरक्षा और संरक्षण विशेष रूप से महिलाओं ,बच्चों ,एवं बुजुर्गों की सुरक्षा और स्वास्थ्य शिक्षा। भारत की वर्तमान जनसंख्या का लगभग 31% को शहरों में बसता है और इनका सकल घरेलू उत्पाद में 63 प्रतिशत जनगणना 2011, का योगदान है। ऐसी उम्मीद है कि वर्ष 2030 तक शहरी क्षेत्र में भारत की आबादी का 40% रहेगा और भारत के सकल घरेलू उत्पाद में इसका योगदान 75 प्रतिशत का होगा इसके लिए भौतिक ,संस्थागत ,सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढांचे के व्यापक विकास की आवश्यकता है यह सभी जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने ,एवं लोगों और निवेश को आकर्षित करने, विकास एवं प्रगति एक गुनी चक्र की स्थापना करने में महत्वपूर्ण है। स्मार्ट सिटी का विकास इसी दिशा में एक कदम है स्थानीय विकास को सक्षम करने और प्रौद्योगिकी की मदद से नागरिकों के लिए बेहतर परिणामों के माध्यम से जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने तथा आर्थिक विकास को गति देने हेतु भारत सरकार द्वारा अभिनव और नई पहल है।स्मार्ट सिटी के वितरण की समीक्षा मिशन के कार्यान्वयन के 2 साल बाद की जाएगी चुनौती ने राज्य/ शहरी स्थानीय निकायों के प्रदर्शन की आकलन के आधार पर राज्यों के बीच संभावित स्मार्ट शहरों में से कुछ का पुणः आवंटन शहरी विकास मंत्रालय द्वारा किया जा सकता है।

स्मार्ट सिटी का वित्त पोषण
सिटी मिशन एक केंद्र प्रायोजित योजना सीएसएस के रूप में संचालित किया जाएगा और केंद्र सरकार द्वारा मिशन को 5 साल में 48000 करोड रुपए करीब प्रतिवर्ष प्रति शहर 100 करोड़ रुपए औसत वित्तीय सहायता देने का प्रस्ताव है। एक समान राशि, एक मेल के आधार पर, राज्य यूएलबी द्वारा योगदान किया जाएगा। इसलिए सरकार यूएलबी धन का लगभग एक लाख करोड़ रुपए स्मार्ट सिटी के विकास के लिए उपलब्ध होगा। व्यापक विकास क्षेत्रों में भौतिक ,संस्थागत ,सामाजिक ,और आर्थिक बुनियादी ढांचे को एकीकृत करके होता है। सरकार की कई क्षेत्रीय योजनाएं इस लक्ष्य मे क्षएकाग्र होती हैं, हालांकि उनकी रास्ते अलग है। शहरी परिवर्तन को प्राप्त करने में अमृत और स्मार्ट सिटी मिशन के बीच एक मजबूत पूरक है। अमृत एक परियोजना आधारित दृष्टिकोण का अनुसरण करता है जबकि स्मार्ट सिटी मिशन एक क्षेत्र आधारित रणनीति है। इसी तरह केंद्रीय और राज्य सरकार के कार्यक्रमों स्मार्ट शहरों के मिशन के साथ योजनाओं की अभिसरण की मांग करके काफी लाभ प्राप्त किया जा सकता है। कौशल विकास सभी के लिए आवास संग्रहालय के निर्माण के लिए संस्कृति विभाग द्वारा वित्त पोषित और स्वास्थ्य शिक्षा और संस्कृति के रूप में सामाजिक बुनियादी ढांचे से जुड़े अन्य कार्यक्रम में अभिसरण की तलाश करना चाहिए। पुनर्विकास और ग्रीन फील्ड विकास विकास हेतु क्षमता सहायता की जरूरत होगी चैलेंज में में भाग लेने से पूर्व योजना बनाने की दौर में ही समय और संसाधनों में प्रमुख निवेश करना होगा। यह पारंपरिक डीपीआर संचालित दृष्टिकोण से अलग है। स्मार्ट सिटी मिशन को सक्रिय रूप से प्रशासन और सुधारों में भाग लेने वाले स्मार्ट लोगों की आवश्यकता है। नागरिक भागीदारी शासन में एक औपचारिक भागीदारी की तुलना में काफी अधिक है। स्मार्ट लोगों की भागीदारी आईसीटी के बढ़ते उपयोग, विशेष रूप से मोबाइल आधारित उपकरणों के माध्यम से स्पेशल परपज व्हीकल एचपीवीसी द्वारा सक्रिय किया जाएगा।