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कर्नाटक की सरकार ने एक बिल पास किया था ,जिसमें प्राइवेट नौकरी में भी 70% आरक्षण उन लोगों को दिया जाएगा ,जिसका जन्म कर्नाटक में हुआ हो एवं 15 वर्ष से वह कर्नाटक में रह रहा हो और कन्नड़ जानता है .ऐसे में बाहर के राज्य जैसे उत्तर प्रदेश बिहार झारखंड के सभी लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता क्योंकि बेंगलुरु और पुणे में अधिकतर स्टूडेंट बाहर से ही जाते हैं वहां या तो पढ़ते हैं या फिर रोजगार करते हैं. कर्नाटक को इससे राजस्व का भारी क्षति होता क्योंकि कर्नाटक में जो पैसा जा रहा है वह उत्तर प्रदेश बिहार और झारखंड जैसे राज्यों के कमाई वहां पहुंचती है . वर्ष 2022 में इसी प्रकार का कानून हरियाणा में भी लाया गया था. इसका नतीजा यह हुआ कि अधिकांश कंपनी हरियाणा छोड़ दी थी. इसके पहले आंध्र प्रदेश में भी यह कानून बना था जिसे हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया था. कांग्रेस की सरकार ने कर्नाटक में चुनाव के पहले यह वादा किया था और इसलिए इसे लागू करना चाहती है. अगर संविधान की बात की जाए तो संविधान का अनुच्छेद 14, 15 एवं 19 का या उल्लंघन होगा .अगर किसी राज्य में वहां के स्थानीय कोई पूरी नौकरी दी जाएगी तब. भारत में आरक्षण की तीन व्यवस्था की गई है. जाति और धर्म के आधार पर है ,आर्थिक आधार पर है और भाषा क्षेत्रीय पहचान के आधार पर भी है.