मुख्य सचिव ने सभी जिलों के उपायुक्तों से कहा बिना खतियान के भी बन सकता है जाति प्रमाण पत्र!

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कार्मिक प्रशासनिक सुधार राजभाषा विभाग ने दिया स्पष्ट आदेश!
मुख्य सचिव सुखदेव सिंह ने जाति प्रमाण पत्र जारी करने में आ रही परेशानियों को दूर करने का निर्देश दिया है उन्होंने सभी जिलों के उपायुक्तों से जाति प्रमाण पत्र में लंबित व निष्पादित मामलों की जानकारी मांगी है कहा है कि राज्य में बिना खतियान के स्थानीय जांच के आधार पर भी जाति प्रमाण पत्र बनाया जाना है. अंचल कार्यालय से बनाए गए जाति प्रमाण-पत्र के आधार पर अभ्यर्थी ऑनलाइन आवेदन करेंगे उस आवेदन के आधार पर अनुमंडल अधिकारी कार्यालय से जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।
      मुख्य सचिव ने उपायुक्त से कहा है कि कार्मिक, प्रशासनिक सुधार और राजभाषा विभाग द्वारा इससे संबंधित स्पष्ट आदेश जारी है! खतियान नहीं होने या परिवार के अन्य सदस्यों का पूर्व से प्रमाण पत्र नहीं बनने की वजह से किसी का जाति प्रमाण पत्र लंबित नहीं रहना चाहिए , ऐसी परिस्थितियों में आवेदक के आवेदन की जांच स्थानीय स्तर पर कराई जाएगी.
मुखिया व ग्राम सभा की रिपोर्ट के साथ स्थानीय स्तर पर जांच कराकर जाति प्रमाण पत्र जारी किया !  स्थानीय जांच प्रतिवेदन के आधार पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है इसके बाद अनुमंडल अधिकारी कार्यालय से जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा मुख्य सचिव ने कहा है कि अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति और ओबीसी के विस्थापित आवेदकों का जाति प्रमाण वर्तमान पता के आधार पर भी जारी किया जा सकता है इससे छात्रों को सहूलियत होगी मालूम हो कि खतियान की बाध्यता को कारण बताते हुए जाति प्रमाणपत्र के आवेदनों को लंबित रखे जाने की शिकायत है इससे छात्रों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है

जाति प्रमाण पत्र के लिए क्या हो रही है परेशानियां:-
* आवेदक से राजस्व संबंधित कागजात की मांग की जाती है!
* खतियान , डीड या जमीन के अन्य कागजात को अनिवार्य बताया जाता है!
* ग्राम सभा का अनुमोदन या वार्ड पार्षद या स्थानीय मुखिया का अनुमोदन मांगा जाता है!
* ग्राम सभा का अनुमोदन मिलने के बाद भी संबंधित सीओ मामला डालते हैं!
* आवेदक को अपनी जाति के बारे में बताने के लिए बार-बार चक्कर लगाना पड़ता है!

जाति प्रमाण पत्र नहीं बनने के कारण नहीं मिल रहा आरक्षण का लाभ
रांची जिले में रह रहे भंगी जाति के लोगों का जाति प्रमाण पत्र नहीं बन रहा है पिछले 5 सालों से यह स्थिति बनी हुई है जाति प्रमाण पत्र नहीं बनने के कारण जहां इस जाति के लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है वहीं शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्र-छात्राओं को राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाले स्कॉलरशिप से भी वंचित रहना पड़ रहा है भंगी समुदाय के के लोग राजस्थान से माइग्रेट होकर आए हैं जब देश गुलाम था तो अंग्रेज इस समुदाय के लोगों को साफ सफाई के लिए लेकर आया करते थे शुरुआत में यह नगर निगम से सफाई करने का काम करते थे इसके अलावा  ढोने का भी काम इन्हीं लोगों से करवाया जाता था! आजादी के बाद धीरे-धीरे इस समाज के लोगों में जागृति आई सरकार ने भी मैला ढोने की प्रथा पर लगाम लगाया तो यह धीरे-धीरे मुख्यधारा में शामिल हुए लेकिन शुरू से ही भूमिहीन रहने के कारण अब तक इनको जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा रहा है!


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