अर्थव्यवस्था में बदलाव के लिए आसियान से उम्मीद

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1.कोरोना संक्रमण के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या बदलाव आया है?
2.अर्थव्यवस्था में बदलाव के लिए आसियान से क्या उम्मीद है?

कोरोना वायरस के संक्रमण तथा उसके रोकथाम से संबंधित उपाय की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर काफी गहरा असर पड़ा है इसका एक पहलू भू-राजनीतिक समीकरणों और राजनीतिक संबंधों में भी बदलाव आया है और भारत ऐसे में अपने आर्थिकी को संभालने के लिए आत्मनिर्भरता पर जोर दिया है इसके साथ ही देश में के साथ ही द्विपक्षीय और बहुपक्षीय व्यापार समझौतों की पर भी समीक्षा की जा रही है।
इसे लेकर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दक्षिण पूर्व एशिया के 10 देशों के आसियान से भारत के मुक्त व्यापार समझौते में फेरबदल की जरूरतों को बताया है मौजूदा समझौते से आसियान के बीच सामानों के आयात निर्यात में संचालित करने के लिए वर्तमान में अगस्त 2019 में हस्ताक्षर किए गए थे जो जनवरी 2010 से लागू किया गया था एवं 2020 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। अगर आवश्यक सुधार हुए तो द्विपक्षीय व्यापार 2025 तक 300 अरब डॉलर हो जाएगा।

दोनों तरफ से आयात व निर्यात बढ़ाने के लिए इस बात पर ध्यान देना अति आवश्यक है कि जिस तरह से भारत ने आसियान देशों के बाजार में वस्तुओं को उपलब्ध कराया है। उसी तरह इन देशों में भी भारतीय निर्यात की गुंजाइश में बढ़ सके। 2001 और 2009 के बीच द्विपक्षीय व्यापार में बढ़त का सालाना औसत 22% के लगभग था । जबकि समझौता होने के बाद यह दर 2010-18 के बीच लगभग 5 फ़ीसदी थी। वर्ष 2018 में आसियान देशो- इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, म्यांमार ,कंबोडिया, वियतनाम, लाओस और ब्रूनेई है।
प्रधानमंत्री मोदी भारत में “लुक ईस्ट” नीति को “एक्ट ईस्ट” नीति में बदलकर पहले ही यह संकेत दे दिया है कि एशिया के इस क्षेत्र के साथ व्यापक संबंधों का आकांक्षी है।

स्त्रोत:- प्रभात खबर


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