नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में नए प्रावधान के अंतर्गत अब शिक्षक पात्रता परीक्षा वर्ष में दो बार होगी एवं इसका आयोजन राज्य सरकार नहीं बल्कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर करवाएगी। बता दें कि केंद्र की सेंट्रल टेट लागू होने के बाद राज्य में नियमित रूप से शिक्षक पात्रता परीक्षा ली जाएगी । झारखंड में केवल 2012 और 2016 में टेट की परीक्षा हुई है इसके अलावा अब तक टेट की परीक्षा नहीं हुई है एवं 2016 में टेट क्वालीफाई किए हुए 50000 अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया 4 वर्ष बाद भी शुरू नहीं हो पाई है। गौरतलब है कि झारखंड के शिक्षा मंत्री द्वारा इस नई शिक्षा नीति पर आपत्ति जताई गई है ।

उन्होंने कहा है कि देश स्तर पर आयोजित परीक्षा में सबसे पहले आयोग का गठन किया जाएगा जो इसके लिए करिकुलम तैयार करेगी । इसमें राज्य के क्षेत्रीय भाषाओं को भी शामिल किया जा सकेगा ताकि संबंधित राज्य के छात्र छात्राओं को कोई समस्या उत्पन्न ना हो । उन्होंने यह भी कहा है कि शिक्षकों में गुणवत्ता होने चाहिए शिक्षक अच्छे होंगे तभी स्कूलों की पढ़ाई के स्तर में भी सुधार होगा परंतु उनका कहना है कि अगर यह राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित की जाएगी तो इससे राज्य के शिक्षक पिछड़ जाएंगे जो उचित नहीं है।