15 जनवरी को केबुल कंपनी पर फैसला लिया जाएगा गौरतलब है कि यह कंपनी 20 सालों से बंद पड़ी है एवं इसे कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स (सीओसी )को भंग किया जाएगा या नहीं यह फैसले 20 सालों के बाद लिया जाएगा कि केबुल कंपनी को खोला जाएगा या दिवालिया घोषित किया जाएगा।

बता दें कि एनसीएलटी में सुनवाई के द्वारा अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव और आकाश शर्मा ने केबुल कंपनी को दिवालिया घोषित करने के बात पर इसका विरोध किया उन्होंने कहा सीओसी का कार्य कंपनी को चलाना है ना कि उसे दिवालिया घोषित करना। साथ ही साथ उन्होंने कहा कि सीओसी कंपनी को चलाने का प्रयास करें अगर इसके बाद भी कंपनी चलाने में असफल होते हैं तब इसे दिवालिया घोषित किया जाए।

बता दें कि 2016 में दिल्ली हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट ने टाटा स्टील को यह कंपनी को चलाने के लिए 40 करोड़ का रिवाइवल प्लान दिया था बावजूद इसके टाटा स्टील ने यह कार्य नहीं किया।