स्वामी सहजानंद सरस्वती के बचपन का नाम क्या था? वे संन्यासी क्यों बन गए ?उनके नाम में सरस्वती टाइटल कैसे आया?

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Nitusingh abtaknews.live

22 फरवरी 1889 को गाजीपुर में महाशिवरात्रि के दिन देवग्राम में सहजानंद सरस्वती का जन्म हुआ था जबकि उनकी मृत्यु 26 जून 1950 को 61 वर्ष की आयु में पटना बिहार में हुआ. उनके बचपन का नाम नौरंग राय था .उनके पिता बेनी राय एक सामान्य किसान थे उन्होंने पटना की निकट bihta में एक आश्रम सीताराम आश्रम बनाया था और वहीं से सारे कार्य को संचालित करते थे. पत्नी की मृत्यु के बाद जब पुनः विवाह की बात आगे बढ़ी तो वह काशी पहुंचकर दशाअश्वमेध घाट स्थित श्री दंडी स्वामी अद्वैतानंद सरस्वती से दीक्षा ग्रहण कर दंड प्राप्त किया और दंडी स्वामी सहजानंद सरस्वती बने .प्रथम दीक्षा इन्होंने काशी में दशनामी सन्यासी स्वामी अद्वितानंद से प्राप्त करके संयासी बन गए. 1913 ईस्वी में बलिया में भूमिहार ब्राह्मण महासभा में प्रथम बार शामिल हुए .काशी से 1914 में भूमिहार ब्राह्मण पत्र निकालना शुरू किया और इसका संपादन भी किया. 1920 में महात्मा गांधी जी से राजनीतिक वार्ता की और मजरुल हक के साथ राजनीति में आने का संकल्प लिया.1921 में गाजीपुर जिला कांग्रेस का अध्यक्ष चुने गए और अहमदाबाद कांग्रेस में शामिल भी हुए. 1924 ईस्वी में कर्मकलाप यानी की जन्म से लेकर मरण तक कौन-कौन से संस्कार होते हैं विशाल ग्रंथ की रचना की. 1925 ईस्वी में ब्रह्मर्षि वंश विस्तार नाम से प्रकाशन शुरू किया. 1930 में हजारीबाग जेल में उन्होंने गीता रहस्य एक भाषा की रचना की .1934 में भूकंप पीड़ित की सेवा हेतु बिहार में समिति बनाया .1936 में अखिल भारतीय किसान सभा का संगठन तथा प्रथम अधिवेशन का अध्यक्ष पद भी ग्रहण किया. उन दिनों कांग्रेस के सम्मेलन से ज्यादा भीड़ स्वामी सहजानंद सरस्वतीजी के किसान आंदोलन में होता था .उनके कई पुस्तकों ने प्रसिद्धि पाई .जिसमें ब्रह्माशी वंश विस्तार ब्राह्मण समाज की स्थिति, झूठा मिथ्या अभिमान .कर्मकलाप ,गीता हृदय क्रांति और संयुक्त मोर्चा किसान सभा के संस्मरण , मेरा जीवन संघर्ष.


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