सुपर एल नीनो क्या है और इससे भारत के मानसून पर क्या प्रभाव पड़ता है

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vinay singh jharkhandaajtak.in

सुपर एलिनो क्या है? और क्यों चर्चा में है, विशेष तौर पर अल्लniनो से ही सुपर एलनीनो शब्द की जानकारी मिलती है। अल्लीनो(elnino) एक ऐसी जलवायु घटना है जिसका संबंध कमजोर मॉनसून और वर्षा की अनिश्चितता होता है। वैश्विक मौसम और जलवायु तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण भूमध्य रेखीय प्रशांत महासागर में जब तापमान सामान्य से अधिक हो जाए यानी कि 0.5 °C से अधिक हो जाता है तो इसे अल्लीनो(elnino) की स्थिति बन जाती है और वहां पर गर्म जलधारा उत्पन्न हो जाता है, जिसके कारण प्रशांत महासागर का गर्म जल वहीं रह जाता है वह हिंद महासागर में प्रवेश नहीं कर पाता है। एल nino अगर आ जाएगा तो ऊपरी वायुमंडल की हवाओं का रुख भी बदल जाता है और बारिश का पैटर्न भी बदल जाता है। यहां का वायुमंडल दुनिया के अधिकांश हिस्सों से जुड़ा है, इसलिए सभी क्षेत्र में इसका असर होता है। कई इलाके में बारिश कम हो जाती है। तापमान बढ़ जाता है। कई में अधिक बारिश होती है, जैसे अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में बारिश की कमी हो जाती है। अमेरिका के कुछ इलाके में अधिक बारिश शुरू हो जाती है। वहीं इन दिनों सुपर अल्लीनो (elnino)भी चर्चा में है। अमेरिका के राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन के रिसर्च के मुताबिक, एलनीनो उस कटिबंधीय प्रशांत महासागर क्षेत्र में सक्रिय है। जो एक सुपर अलिनो(elnino) बन जाएगा, इसका मुख्य कारण यह है कि शुरुआती समय में इसका तापमान 0.7 सामान्य से अधिक होता है। आने वाले समय में यह 3° तक जा सकता है यानी कि जब 0.5 से 1° के बीच होता है तो यह एक कमजोर elnino है, लेकिन यह एक से 1.5 के बीच होता है। इसे मॉड्रेट एलनीनो कहते हैं जब यह 1.5 से दो के बीच पहुंच जाता है। इसे एक स्ट्रांग elnino कहा जाता है। अगर यह 3° तक चला जाए तो इसलिए इसे सुपर एलनीनो कहेंगे। इसके आने से भारत का मॉनसून कमजोर हो जाता है क्योंकि अपेक्षाकृत बंगाल की खाड़ी और अरब सागर का जल ठंडा रह जाता है।


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