सारंडा जंगल eco सेंसिटिव zone

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झारखंड में सारंडा जंगल में इको सेंसेटिव जोन कितने किलोमीटर में लागू किया गया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सारंडा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी की घोषणा 23 जुलाई तक करनी है लेकिन प्रस्तावित क्षेत्र में के प्रमुख लौह अयस्क खदान भी स्थित है. खान विभाग की एक्सपर्ट कमेटी ने सुझाव दिया है की सेंचुरी का क्षेत्र पश्चिम दिशा की ओर बढ़ाया जाए ताकि खदान को बचाया जा सके .एक किलोमीटर के दायरे में इको सेंसेटिव जोन घोषित करने के अनुशंसा की गई है .जिससे खनन प्रभावित न हो और पर्यावरण सुरक्षा भी बनी रहे. चाईबासा क्षेत्र में लगभग 4 बिलियन टन लोहा अयस्क का रिजर्व है. जिससे आने वाले 30 वर्षों में 25 लाख करोड रुपए का लोहा निकाल सकते हैं. एनजीटी ने सारंडा में वन्य जीव अभ्यारण बनाने का निर्देश दिया था. पर राज्य सरकार द्वारा इसका पालन नहीं किए जाने पर मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार को हलफनामा दायर करने का निर्णय दिया था. 29 अप्रैल को दायर हलफनामा में विभाग ने कहा कि अब में 31468 हेक्टेयर के मूल प्रस्ताव के स्थान पर 57 519 हेक्टेयर को वन्य जीव अभ्यारण के रूप में करने का प्रस्ताव किया है. 13.06 किलोमीटर क्षेत्र को संरक्षण रिजर्व के रूप में आदेश सूचित करने का प्रस्ताव किया गया है. मामले के अनुपालन पर 23 जुलाई 2025 को सुनवाई होगी. राज्य सरकार के वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में राज्य वन्य जीव बोर्ड का पुनर्गठन किया है. विभाग के मंत्री उपाध्यक्ष होंगे .जामा विधायक लुईस मरांडी तिरपा विधायक संदीप गुड़िया और माणिक विधायक रामचंद्र सिंह सदस्य बनाए गए हैं .वन विभाग के सचिव व प्रधान मुख्य वन संरक्षक कृषि पदेन सदस्य होंगे. पीसीएफ 1 ग्रामीण सदस्य सचिव होंगे .पदेन सदस्य में आदिवासी कल्याण आयुक्त md पर्यटन निगम ,डीजीपी द्वारा नामित महानिरीक्षक या उससे उच्च स्तर की पदाधिकारी ब्रिगेडियर स्तर के पदाधिकारी निदेशक, पशुपालन निदेशक, मत्स्य उपवन महानिदेशक वाइल्डलाइफ प्रिजर्वेशन भारतीय वन्य प्राणी संस्थान देहरादून के प्रतिनिधि बोटैनिकल सर्वे आफ इंडिया के प्रतिनिधि जूलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे


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