संसद के अंदर प्वाइंट आफ ऑर्डर क्या होता है. कब यह लागू होता है?आपने अक्सर चर्चा में सुना होगा, इसका मतलब समझिए

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Vinay singh jharkhand aajtak in

Point of का आर्डर का प्रश्न कोई भी सदस्य उस समय उठाना है जब किसी मामले का चर्चा करते समय गैर जरूरी चीजों को उठाया गया. उस समय सदस्य को कुछ भी बोलने से रोक दिया जाता है और उसे कहा जाता है की आपको जो विषय में बोलना है इस पर बोलिए. उस समय जो सदस्य किसी और चीज के लिए बोल रहा है उसे उस समय बैठ जाना होता है .फिर सदन के अध्यक्ष यह फैसला करते हैं कि इसे बोलने दिया जाए या नहीं. किस शब्द को सदन से हटा देना है उस वाक्य के दौरान और किसे रखना है. इसका फैसला भी सदन के अध्यक्ष करते हैं जिस समय सदन के अध्यक्ष कोई पॉइंट ऑफ ऑर्डर की याद दिला रहे हैं उस समय इसका विरोध नहीं किया जा सकता है.संविधान को लागू करने के लिए यह जरूरी होता है सदन का ध्यान उस और खींचा जाता है जिसके लिए सदन बुलाई गई है और जिस पर चर्चा हो रही है. उदाहरण के लिए वक्फ बोर्ड पर चर्चा करते समय जब आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने राज्यसभा में राम मंदिर के मुद्दे को उठा दिया तो इस पॉइंट ऑर्डर के अंतर्गत लाया गया. इसी प्रकार से 2021 में त्रिमूल कांग्रेस ने प्वाइंट आफ ऑर्डर का प्रश्न उठाया था. जब भाषण के दौरान अससंदीय भाषा का प्रयोग किया जाता है या आमर्यादित भाषा का प्रयोग किया जाता है तो उसे प्वाइंट आफ ऑर्डर के तहत निकाल दिया जाता है.


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