लॉकडाउन और ऑनलाइन क्लास के बाद देश में बच्चों की शिक्षा व्यवस्था बुरी तरीके से प्रभावित .अधिकांश बच्चे नहीं जानते हैं जोड़, घटाव ,गुणा ,भाग. पांचवी छठी के बच्चे को एक क्लास का किताब पढ़ना भी नहीं आता

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लॉकडाउन और ऑनलाइन क्लास के बाद देश में बच्चों की शिक्षा व्यवस्था बुरी तरीके से प्रभावित .अधिकांश बच्चे नहीं जानते हैं जोड़, घटाव ,गुणा ,भाग. पांचवी छठी के बच्चे को एक क्लास का किताब पढ़ना भी नहीं आता. Abtaknews.live Nitusingh
देश के विभिन्न स्कूल के प्राइमरी कक्षा में लगभग 12 करोड़ बच्चे पढ़ रहे हैं. फाऊंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमैरेसी रिपोर्ट में जो नई बातें आई है वह आश्चर्यजनक और चौंकाने वाली है .पांचवी कक्षा के करीब 50% बच्चे दूसरी कक्षा का किताब को पढ़ नहीं सकते हैं जबकि अधिकांश बच्चे जोड़ घटाव गुणा भाग नहीं जानते हैं. खास बात यह है कि तीसरी कक्षा तक के सिर्फ 3% बच्चे ही भाग जानते हैं. 15 वर्ष से यह स्टडी हो रहा है .खास करके लॉकडाउन के समय स्थिति और खराब हो गया है. जिन बच्चों ने प्राइमरी स्कूल की शिक्षा हासिल नहीं की जब वह 18 साल तक के हो जाते हैं तो ऐसे बच्चे हिंसा में उतर जाते हैं. लगभग 70% बच्चों का भविष्य अंधकार में होने के बाद अपराधी प्रवृत्ति का होने लगता है. यह इस रिपोर्ट में बताया गया है कुछ राज्यों की अगर बात करें तो हरियाणा में सातवीं कक्षा के लगभग 65% और पांचवी कक्षा के लगभग 51% बच्चे भाग दे सकते हैं जबकि केरल में 51% और 63% ही है. 2018 में प्राइमरी में पढ़ने वाले हर बच्चे पर लगभग ₹15000 से ज्यादा खर्च हुआ है. इसी प्रकार से फाऊंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमैरेसी इंडेक्स 40 अलग-अलग मानक पर तैयार किया गया इसमें घर से स्कूल की दूरी ,स्कूल में बिजली की व्यवस्था, स्कूल में खेल का मैदान ,लाइब्रेरी, इंटरनेट की सुविधा, एडमिशन और ड्रॉपआउट का रेट ,शिक्षकों की उपलब्धता ,शिक्षकों की गुणवत्ता, शिशु मृत्यु दर जैसी सभी चीजों को शामिल किया गया. इस रिपोर्ट के मुताबिक केरल के साथ दिल्ली छत्तीसगढ़ बेहतर में आए हैं .


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