झारखंड के स्थापना के 20 साल पूरा होने के बाद राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता में तो कोई सुधार नहीं हुआ है बल्कि राज्य के स्कूलों एवं शिक्षकों की संख्या पहले की तुलना में दोगुनी हो गई है। भारत सरकार द्वारा जारी की गई नेशनल अचीवमेंट सर्वेक्षण के अनुसार राज्य में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की जैसे तैसे कक्षा बढ़ती रहती है परंतु बच्चे पढ़ाई में कमजोर होते जाते हैं। जिसके बाद विद्यार्थियों का ड्रॉपआउट रेट बढ़ने लगता है इसलिए राज्य में स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा को लेकर किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की जानी चाहिए।
शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए 20 सालों से लगातार बच्चों में बढ़ोतरी की जा रही है जिसका असर यह हुआ कि राज्य में पिछले 20 वर्षों में स्कूलों की संख्या 20,000 से बढ़कर 35000 हो गई है। आठवीं से मैट्रिक तक पहुंचते स्कूलों में लगभग 100000 बच्चे कम हो जाते हैं । राज्य में उच्च शिक्षा में 73 विद्यार्थी पर एक शिक्षक जबकि 40 पर एक होना चाहिए स्कूलों की संख्या 10,000 से अधिक प्राथमिक विद्यालयों को अपग्रेड किया गया है जिससे हाई स्कूल 750 से बढ़कर 1830 हो गई है । वर्ष 2020 में शिक्षकों की संख्या बढ़कर 1.18 लाख हो गई है जो 20 साल पहले 45000 थी।