राज्य में गठबंधन सरकार बनने के बाद सरकार के सामने अपने किये वादे को पूरा करना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। बता दे कि झामुमो ने अपने घोषणा पत्र में ऐसे कई वादे किए हैं जिसके लिए सरकार के कोष में पर्याप्त राशि नहीं है । झामुमो ने अपने घोषणा पत्र में सात राज्यों को विश्वस्तरीय बनाने का घोषणा की थी जिसमें चाईबासा, गढ़वा ,पलामू, गिरिडीह ,साहिबगंज दुमका और देवघर शामिल है।

बता दें कि इसे पूरा करने के लिए 25000 करोड़ से भी अधिक राशि की जरूरत होगी , इसके अलावा झामुमो सरकार ने झारखंड के गरीब परिवारों को सालाना 72000 देने का वादा किया है जिसमें लगभग 4500000 परिवार गरीबी रेखा से नीचे है इसके लिए कम से कम सालाना 4000 करोड खर्च होंगे,

खेतिहर मजदूरों को स्वरोजगार के लिए ₹15000 का अनुदान देने की घोषणा की गई है जिसके लिए 15 सौ करोड रुपए सालाना खर्च करने होंगे क्योंकि राज्य में लगभग 10 लाख खेतिहर मजदूर है। झामुमो ने यह भी घोषणा की थी कि राज्य के 500000 युवाओं को नौकरी दी जाएगी परंतु केवल 200000 सरकारी पद ही खाली हैं 300000 पद सिंचित करने होंगे ।

अगर देखा जाए तो सभी वादों को पूरा करने के लिए सरकार को 60000 करोड रुपए की आवश्यकता होगी। बता दे कि 2019 में 86 हजार करोड रुपए तक का बजट पेश किया गया था। वित्तीय वर्ष जाने में अभी भी 3 महीना बाकि है और अभी 3 महीने में ₹45,500 करोड रुपए खर्च करना है जो आसान नही होगा।