भारतीय संसद में पहला विशेष सत्र कब आयोजित किया गया था

Share The News

Nilam abtaknews.live

देश की आजादी के पूर्व संध्या पर 14 अगस्त 1947 को पहले विशेष सत्र बुलाया गया था

आजादी के बाद संसद का विशेष सत्र तीन बार कब बुलाया गया है

22 जुलाई 2008 को वामपंथी दल द्वारा upa सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद विश्वास मत के लिए लोकसभा का विशेष सत्र बुलाया गया .सरकार ने इसमें विश्वास मत हासिल कर लिया था .इसी प्रकार से तीन एवं चार जून को 1991 ईस्वी में हरियाणा में राष्ट्रपति शासन की मंजूरी के लिए राज्यसभा का विशेष सत्र बुलाया गया था .28 फरवरी 1977 को तमिलनाडु और नगालैंड में राष्ट्रपति शासन का समय increase के लिए राज्यसभा का विशेष सत्र बुलाया गया था .18 सितंबर से लेकर 22 सितंबर तक 2023 में संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है . इसी प्रकार से 1972 में 14 एवं 15 अगस्त को विशेष सत्र बुलाया गया था. इस दौरान भारत की आजादी के 25 साल पूरे होने का जश्न मनाया गया .1992 में 9 अगस्त की आधी रात को विशेष Satra बुलाया गया था .उस दिन भारत छोड़ो आंदोलन की 50वीं वर्षगांठ मनाई गई. 1997 में 14 एवं 15 अगस्त की रात्रि को भारत की स्वतंत्रता के 50 साल पूरे होने पर विशेष सत्र बुलाया गया था.2012 ईस्वी में 13 may को राज्यसभा और लोकसभा की पहली बैठक की 60th वर्षगांठ बनाने के लिए विशेष सत्र बुलाया गया था. वर्ष 2015 में 26 नवंबर को डॉक्टर बी आर अंबेडकर की 125 में जयंती पर विशेष बैठक बुलाई गई और संविधान दिवस मनाया गया था.

सत्र बुलाने के लिए भारतीय संविधान में कौन सी व्यवस्था दी गई है

संसद सत्र बुलाने का अधिकार सरकार के पास होता है. यह निर्णय संसदीय मामलों की कैबिनेट समिति द्वारा किया जाता है .जिसे बाद में राष्ट्रपति द्वारा औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी जाती है. संविधान के अनुच्छेद 85 में प्रावधान है कि संसद की प्रत्येक साल में कम से कम दो बार बैठक होनी चाहिए .दो सत्र के बीच 6 महीने से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए .सत्र बुलाने को लेकर कोई निश्चित कैलेंडर नहीं है लेकिन यह एक परंपरा है. जिसमें आमतौर पर एक साल में संसद का तीन सत्र होता है बजट सत्र, मानसून सत्र और शीतकालीन satra. इसके अलावा किसी भी समय विशेष आयोजन के लिए सत्र बुलाया जा सकता है. यह सामान्य सत्र की तरह ही माना जाता है. संवैधानिक प्रावधान है अभी है कि इसके लिए किसी भी सदस्य को पहले से सूचना देने की जरूरत नहीं है ना ही एजेंडा बताना है. हालांकि सांसदों को 15 दिन पहले यह बता देना है कि संसद का सत्र बुलाया गया है. एजेंडा बताना जरूरी नहीं होता है .सरकार अगर चाहे तो संसद की बैठक के 1 दिन पहले बुलेटिन जारी करके या सभी दल के नेता को बुलाकर यह बता सकती है की बैठक क्यों बुलाया गया है .


Share The News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *