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कौन थे ब्रह्मेश्वर मुखिया?
रणवीर सेना से क्या था संबंध?जानिए विस्तारपूर्वक.
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भोजपुर जिले के खोपिरा गाँव (आरा जिला) के रहने वाले मुखियाजी भूमिहार जाति से संबंधित थे। ब्रह्मेश्वर सिंह, जिन्हें ब्रह्मेश्वर मुखिया के नाम से भी जाना जाता है, का जन्म 13 मार्च, 1947 को हुआ था और 1 जून, 2012 को उनकी हत्या कर दी गई थी। बिहार में नक्सली संगठन और बड़े किसानों के बीच खूनी लड़ाई के दौर में एक वक्त वो आया जब बड़े किसानों ने मुखिया के नेतृत्व में अपनी एक सेना बनाई थी। सितंबर 1994 में ब्रह्मेश्वर, मुखिया के नेतृत्व में जो संगठन बना उसे रणवीर सेना का नाम दिया गया। वर्ष 2002 में उन्हें गिरफ्तार करके 9 वर्ष तक जेल में रखा गया। बाद में उन्हें जमानत मिली।
5 मई, 2012 को ब्रह्मेश्वर मुखिया जी ने अखिल भारतीय राष्ट्रवादी किसान संगठन बनाने की घोषणा की, जिसमें किसानों और मजदूरों को उसका हक दिलाने के लिए लड़ाई लड़े।
1 जून, 2012 को ब्रह्मेश्वर मुखिया जी जब सुबह के वक्त टहल रहे थे। अपने घर के पास ही उसी समय अज्ञात हमलावरों ने 5 गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। पहले बिहार पुलिस और बाद में इस मामले को सीबीआई ने जांच किया जिसमें पूरी डेटा और नंबर की सीडीआर भी देखी गई, लेकिन कई साल की जांच के बाद भी अभी तक मुख्य कातिल तक पुलिस और सीबीआई नहीं पहुंच पाई है। इसके लिए ₹1000000 का इनाम देने का घोषणा भी किया गया है. 29 अगस्त, 2002 को पटना में जब एग्जिबिशन रोड से ब्रह्मेश्वर मुखिया जी को गिरफ्तार किया गया तब जाकर लोगों को पता चला कि लंबे कद के ब्रह्मेश्वर मुखिया कैसे दिखते हैं। 9 साल जेल की सजा काटने के बाद 8 जुलाई, 2011 को उनके रिहाई हुई। ब्रह्मेश्वर मुखिया और उनकी रणवीर सेना की जांच करने के लिए तत्कालीन राष्ट्रीय जनता दल सरकार ने अमीर दास आयोग बनाया था, जिसे बाद में 2006 में भंग कर दिया गया।