vinay singh jharkhandaajtak.in
बिहार में मृत बाप, दादा या अन्य पूर्वज के नाम पर जो जमीन दर्ज है उसे इस प्रकार से हासिल किया जा सकता है।
बिहार में अब मृत बाप दादा या अन्य पूर्वज के नाम जमीन का नामांतरण कराने के लिए वर्षों तक अंचल कार्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने ऐसी व्यवस्था लागू की है जिसमें राजस्व कर्मी खुद गाँव गाँव जा कर, मृत जमाबंदी धारक की पहचान करेंगे और उत्तराधिकारी के नाम पर दाखिल खारिज की प्रक्रिया को कराई जाएगी। विभाग के सचिव जय सिंह ने सभी प्रमंडल आयुक्त और डीएम को मास्टर सर्कुलर जारी कर इस व्यवस्था को तत्काल लागू करने का निर्देश दिया है। विभाग का उद्देश्य वर्षों से लंबित उत्तराधिकार आधारित नामांतरण के मामलों का तेजी से निपटारा करने और भूमि अभिलेख को अदतन बनाना है। अभी तक मृत्यु जमाबंदी धारक के अधिकारी को स्वयं आवेदन देना पड़ता था। जानकारी के अभाव, पारिवारिक विवाद और उदासीनता के कारण बड़ी संख्या में जमीन आज भी मृत पूर्वज के नाम पर दर्ज है। इससे सरकारी योजना का लाभ लेने जमीन की खरीद बिक्री, बैंक ऋण और अन्य राजस्व कार्य में परेशानी होती है। विभाग का अनुमान है कि राज्य के 60% से अधिक भूधारी इस समस्या से प्रभावित है। राज्य कर्मचारी की रिपोर्ट के आधार पर अंचल अधिकारी ऑनलाइन पोर्टल पर स्वतः संज्ञान लेते हुए दाखिल खारिज की कार्रवाई पूरी कर देंगे। पूरी प्रक्रिया बिहार भूमि पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज होगी। विभाग ने प्रत्येक राज्य कर्मचारी को हर महीने कम से कम 5 जमाबंदी मामलों का निष्पादन करने का लक्ष्य दिया है। अपर समाहर्ता और अंचल अधिकारी इसकी नियमित समीक्षा करेंगे। नई व्यवस्था के तहत राजस्व कर्मचारी पंचायत की जन्म मृत्यु पंजी, चौकीदार की रिपोर्ट, जन प्रतिनिधि और स्थानीय लोगों से मिली सूचना के आधार पर मृत धारकों की सूची तैयार करेंगे। इसके बाद वैध उत्तराधिकारी के संपर्क कर आवश्यक दस्तावेज और सहमति प्राप्त करेंगे। 7 दिन के भीतर कागजात मिलने पर बंटवारा आधारित दाखिल खारिज की कार्रवाई शुरू होगी। यदि बंटवारा नहीं होता है, तो उत्तराधिकार आधारित नामांतरण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।