परिसीमन आयोग क्या है? इसकी नियुक्ति कौन करता है ?संविधान में क्या प्रावधान है ?पूर्व में परिसीमन कब हुआ था?

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vinay singh jharkhandaajtak.in

परिसीमन क्या है, संविधान के किस अनुच्छेद में इसकी जानकारी दी गई है?
निर्वाचन क्षेत्र की सीमा को नए सिरे से तय करने की प्रक्रिया को परिसीमन या डीलिमिटेशन कहते हैं। संविधान के अनुच्छेद 81 और अनुच्छेद 82 में व्यवस्था किया गया है कि लोकसभा में राज्य को मिलने वाला प्रतिनिधित्व, जिसे सीट के तौर पर देखेंगे ,सीधे तौर पर उनकी जनसँख्या के अनुपात में होना चाहिए। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के हर नागरिक के वोट का मूल्य बराबर हो जाए। नियम के अनुसार, हर नई जनगणना के बाद जनसंख्या के बदलते आंकड़े के आधार पर सीटों का पुनः समायोजन किया जाना जरूरी है। इसके साथ ही परिसीमन का एक अनिवार्य सिद्धांत यह भी है कि किसी एक राज्य के भीतर जितने भी निर्वाचन क्षेत्र हैं, उन सभी में जनसंख्या का वितरण जहां तक संभव हो। बिल्कुल समान होना चाहिए। सीधे शब्द में कहें तो यह एक ऐसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया है जो जनसँख्या के आधार पर निष्पक्ष और बराबर राजनीतिक प्रतिनिधित्व तय करती है। परिसीमन के 3 मुख्य और बड़े कारण है। परिसीमन का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि हर एक सांसद या विधायक लगभग बराबर आबादी का प्रतिनिधित्व करें। पलायन ने शहरीकरण के चलते कुछ शहरी इलाके की आबादी बहुत तेजी से बढ़ जाती है। परिसीमन के जरिए उन क्षेत्र की सीमा को दोबारा तय किया जाता है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीट उनकी आबादी के अनुपात में तय और की जाती है और बदली जाती है, जो परिसीमन के दौरान ही होता है। भारत में परिसिमन के राष्ट्रपति की ओर परिसीमन आयोग का गठन किया जाता है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज, मुख्य चुनाव आयुक्त और संबंधित राज्य के चुनाव आयुक्त शामिल होते हैं। बड़ी अहम बात यह है कि इस आयोग के फैसले को किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती है। स्वतंत्रता के बाद से अभी तक 4 बार परिसीमन आयु का गठन हो चुका है। 1952 में ,1963 ईस्वी में, 1973 ईसवी में और वर्ष 2002 ईस्वी में वर्ष 1976 में इंदिरा गांधी सरकार और फिर वर्ष 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने लोकसभा सीट को कुल जनसंख्या को वर्ष 2026 तक फ्रिज कर दिया था, ताकि जिन राज्य में जनसंख्या नियंत्रण पर अच्छा काम किया है विशेषकर दक्षिण भारतीय राज्य उनकी सीट कम ना हो पाए यही वजह है कि वर्ष 2026 में परिसीमन का मुद्दा एक बार फिर से राजनीति के केंद्र में आ चुका है. संसद के विशेष सत्र के दौरान अप्रैल 2026 में परिसीमन विधेयक 2026, इसके साथ 131वां संविधान संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश किया गया लेकिन संविधान संशोधन के लिए आवश्यक 2/3 बहुमत न मिलने के कारण यह विधेयक पास नहीं हो पाया। तब विधेयक के पक्ष में 2 9 8 और विपक्ष में 230 वोट पड़े थे। इसे पारित करने के लिए 352 वोट आवश्यक है।


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