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झारखंड में आने वाले चुनाव में बहुत सारे नेता अब चुनाव नहीं लड पाएंगे .इसका मुख्य कारण उनके खिलाफ चल रही आपराधिक व अन्य मामले हैं ,जिन लोगों को दो या उससे अधिक वर्ष का सजा हो चुका है .वह चुनाव लड़ने के लिए अब योग्य नहीं है. पूर्व मुख्यमंत्री मधुकोड़ा चुनाव नहीं लड़ पाएंगे .वह पहले 18 सितंबर 2006 से 27 अगस्त 2008 तक झारखंड के मुख्यमंत्री थे. अर्जुन मुंडा व शिबू सोरेन सरकार की में भी वे मंत्री रहे हैं .वर्ष 2017 में दिल्ली कोर्ट ने मधु koda को कोलकाता स्थित कंपनी विनी आयरन स्टील उद्योग लिमिटेड को झारखंड स्थित कोयला ब्लॉक आवेदन करने में भ्रष्टाचार और साजिश का दोषी पाया और सजा सुनाया. दिल्ली उच्च न्यायालय ने उनकी सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है .फिलहाल वह जमानत पर है. इसी प्रकार से पूर्व मंत्री हरिनारायण राय भी चुनाव नहीं लड़ सकते हैं .रांची की प्रीवेंशन आफ मनी laundering एक्ट की विशेष अदालत में हरि नारायण राय को मनी लेंडिंग केस में दोषी पाते हुए 31 जनवरी 2017 को 7 साल का सजा सुनाया था. इसी कड़ी में another ekka का भी नाम है ,जिन्हें वर्ष 2020 में 7 साल की सजा सुनाई गई है और 2 करोड़ का जुर्माना भी लगाया गया था. इसके अलावा वर्ष 2014 के चुनाव के दौरान एक पारा शिक्षक की हत्या का आरोप में भी वे दोषी है. राज्य के पूर्व मंत्री व कांग्रेसी नेता योगेंद्र साह और उनकी पत्नी निर्मला देवी भी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे. 1 अक्टूबर 2016 को बड़का गांव में हुई पुलिस फायरिंग व गोलीबारी की घटना से संबंधित एक मामले में मंत्री योगेंद्र साह और उनके पति निर्मला देवी को अदालत में 10 साल कैद की सजा सुनाई थी. पूर्व मंत्री और फिलहाल कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की को भी रांची की पीएमएलए की विशेष अदालत में सजा सुनाया था जिसके बाद वह चुनाव लड़ने की योग्य नहीं है. वर्ष 2005 से 2009 तक मंत्री रहने के दौरान आय से अधिक मामले में 7 लाख 22 हजार रुपए की संपत्ति रखने के मामले में अदालत ने उन्हें 3 साल तक की जेल की सजा सुनाई थी.