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झारखंड का असूर रेडियो चर्चा में क्यों है?
नेतरहाट में एक बार फिर से असुर कम्युनिटी रेडियो शुरू होगा, नेतरहाट के जोचीपाट गाँव में अखड़ा स्थल के पास स्थित एक मिट्टी के घर की मरम्मत की जा रही है। इसी घर का उपयोग असुर रेडियो के रिकॉर्डिंग केंद्र के रूप में किया जाएगा। रेडियो प्रसारण के लिए गीत, कहानी और अन्य सामग्री एकत्र की जा रही है। जल्द ही इनकी रिकॉर्डिंग शुरू होगी और नेतरहाट के हाट बाज़ार में एक बार फिर से असुरी भाषा में इसका प्रसारण किया जाएगा। अपनी भाषा, अपने गीत और अपनी बातें उसी सहजता और आत्मीयता के साथ रखा जाएगा। रेडियो संचालन के लिए कोर ग्रुप काम करता है जिसमें चिरापाठ आवासीय विद्यालय के कर्मचारी मेलन असूर, कवयित्री सुषमा असुर, अंशिता असुर, विवेक और रोशनी समेत कई लोग शामिल हैं। समुदाय के अन्य सदस्य भी इसमें सहयोग करते हैं। विवेक रेडियो जॉकी की भूमिका निभाते हैं, जबकि सीता असुर समुदाय की लोककथाओं के अनुभव को अपने विशिष्ट अंदाज में प्रस्तुत करती है और रोशनी तो अपनी आवाज़ देती है। असुर रेडियो की शुरुआत वर्ष 2019 में झारखंडी भाषा साहित्य समिति अखड़ा की क्षेत्रीय कमेटी ने किया था। इसका उद्देश्य असुर समुदाय को उसकी अपनी भाषा में खबरें, लोकगीत, कहानी और सामुदायिक मुद्दों से जोड़ना था। प्यारा केरकेट्टा फाउंडेशन की वंदना टेटे बताती है कि यह कोई वेबसाइट रेडियो नहीं था। यह समुदाय की इच्छाशक्ति और सांस्कृतिक प्रतिवत्ता का परिणाम था।