हाल ही में नए शोध में यह बताया गया है कि जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा खतरा कृषि क्षेत्र पर पड़ रहा है। गौरतलब है कि भारत में उत्तर भारत में बढ़ती गर्मी, लू तथा इस से उत्पन्न होने वाले बीमारियों से कृषि श्रमिकों की कार्य क्षमता प्रभावित हो रही है , जिस वजह से कृषि श्रमिकों की भी संख्या दिन-ब-दिन घटती जा रही है

बता दे कि यूरोपियन प्रोजेक्ट अर्थ जर्नलिज्म नेटवर्क रिपोर्ट के अनुसार आने वाले समय में यह क्षति बहुत ही भयावह हो सकती हैं।

इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन एक रिपोर्ट जारी करते हुए कहा है कि 2030 तक भारत में 3.4 करोड़ रोजगारों का नुकसान होगा ।
बता दें कि हरियाणा , पंजाब में कृषि श्रमिकों की संख्या में बहुत ज्यादा कमी आई है जिस वजह से सिर्फ 40 फ़ीसदी श्रमिक ही मिल पा रहे हैं हरियाणा एवं पंजाब, बिहार एवं अन्य प्रदेशों से आने वाले मजदूरों की संख्या में भी काफी गिरावट आई है ।

महिलाओं श्रमिकों का भी इन क्षेत्रों से आना कम हो गया है। श्रमिकों से बातचीत करने पर उन्होंने बताया कि गर्मियों के मौसम में कार्य करना मुश्किल हो रहा है इस वजह से वे लोग कारखानों की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं ताकि वे खेतों में काम करने के दौरान होने वाले बीमारी से बच सकें।