घने कोहरे में भी ट्रेन अच्छा से कैसे चलती है? जानिए व्हाट्सएप डिवाइस को.
Nitusingh abtaknews.live
नई तकनीक से हर विभाग को लाभ हो रहा है. इन दिनों रेलवे ने भी नए टेक्नोलॉजी का पूरा इस्तेमाल किया है .पूर्व में ट्रेन को पता नहीं चल पाता था कि घने कोहरे में उसका सिग्नल किधर दिखा रहा है लेकिन fog सेव डिवाइस जीपीएस आधारित एक उपकरण है जो पायलट को आगे आने वाले सिग्नल की चेतावनी देता है .इसके आधार पर पायलट ट्रेन की स्पीड को नियंत्रित करते रहते हैं. सिग्नल की दृश्यता को बढ़ाने के लिए सिग्नल साइटिंग बोर्ड fog सिग्नल पोस्ट, अधिक व्यक्ति रहने वाले क्रॉसिंग के लिफ्टिंग बैरियर आदि को विशेष तरह के काले पीले रंग से रंग कर चमकीला बनाया गया है. सिग्नल से पहले रेल पटरियों पर सफेद रंग से निशान बनाए गए हैं. ताकि कोहरे में पायलट सिग्नल व अन्य संबंधित निशान को दूर से ही देखकर सतर्क हो जाएं .स्टॉप सिगनल से पहले विशेष पहचान चिन्ह सिगमासॉफ्ट का प्रावधान किया जाता है. फिलहाल ट्रेन की अधिकतम गति 130 किलोमीटर प्रति घंटा है लेकिन लोको पायलट को कोहरा छाने पर ट्रेन को 75 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक की गति से नहीं चलाने की हिदायत देता है .लोको पायलट के रूट के प्रत्येक स्टेशन पर फर्स्ट स्टॉप सिगनल लोकेशन किलोमीटर चार्ट उपलब्ध करा दिया जाता है. इससे उन्हें रूट के बारे में जानकारी पहले ही मिल जाती है. सेफ्टी सलाहकार की ओर से कर्मी को लगातार counseling की जाती है .सभी स्टेशन मास्टर एवं लोको पायलट को पूरा होने पर इसकी सूचना तत्काल नियंत्रण कक्ष को देने विजिबिलिटी की जांच वीटीओ यानी कि विजुअलिटी टेस्टआब्जेक्ट से करते रहने का निर्देश दिया जाता है .यह उपकरण इतना बेहतर होता है कि ट्रेन के इंजन में लगी इस डिवाइस के जरिए पायलट को घने कोहरे में भी दूर से ही सिग्नल समेत ट्रैक पर किसी तरह की गड़बड़ी की जानकारी मिल जाती है.