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क्या है एथेनॉल, कैसे इससे गाड़ी चलेगा?
एथनोल एक प्रकार का अल्कोहल आधारित बायोफ्यूल के रूप में जाना जा रहा है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने का रस, सिरे, मक्का, टूटे या खराब अनाज और कुछ कृषि अवशेष से बनाया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर प्रयोग किया जाता है। इस तरह, जीवाश्म ईंधन की खपत और कच्चे तेल पर निर्भरता कम होती है। एथनॉल को अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन माना जाता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिल सकें। एथनॉल मिश्रण को ई से दर्शाया जाता है। इसके साथ लिखा अंक पेट्रोल में मिलाए गए एथनॉल का अंश दिखाता है। भारत ई 10 का इस्तेमाल कर रहा है। इसमें क्रमश 10 फीसदी एथोनोल और 90 फीसदी पेट्रोल होता है लेकिन ई 20 की ओर बढ़ता जा रहा है। सरकार 2026 तक पेट्रोल में 20% एथनॉल का लक्ष्य तय किया है। व्यावहारिक रूप से, यह कहीं कहीं देखने को मिल रहा है। बीएस 4 या उसे पुरानी गाड़ी में ज्यादा है तो डाला जाने पर कुछ हिस्से में असर करता है और माइलेज घट सकती है इसलिए बीएस 6 फेज 2 जो नई गाड़ी आ रही है उसमें इसे डाला जा सकता है। सरकार ई 85 और ई 100 जैसे ऊंचे एथनॉल मिश्रित पर विचार कर रही है। इसे पूरी तरह फ्लेक्स फ्यूल का रास्ता खुलेगा। यह आसान नहीं होगा क्योंकि इसके लिए नई इंजन तकनीक के साथ देशभर में एथनॉल आपूर्ति और विशेष पंप का बड़ा ढांचा तैयार करना होगा। समय लगेगा, हालांकि ऑटो कंपनी एथनॉल मिश्रण धीरे-धीरे बनाने के बजाय वाहन को सामान और फ्लैक्स फ्यूल दो वर्गों में बांटने के पक्ष में है। इस पर तेजी से काम भी हो रहा है। क्रेटा और टाटा पंच इसी लीक पर काम कर रहे हैं। मारुति ने फ्रॉनक्स और वैगन आर के फ्लैग्स फिल कॉन्सेप्ट पेश किया गया है।