गंगा नदी क्यों चर्चा में है? कौन-कौन सी नदी धाराएँ इसकी समाप्त होने के कगार पर है?
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गंगा नदी में कई छोटी नदी गंगा की धारा को और मजबूत करती है. जिसमें कतरी एवं दामोदर नदी जो हुगली नदी में जाकर मिलती है, खुदिया, बराकर दामोदर भी हुगली में ही मिल जाती है, बाकी नॉर्थ कोयल सोन में मिलती है और सोन गंगा में मिलती है। इसी प्रकार से दानरो नॉर्थ, कोयल सोन में मिलकर गंगा में मिलती है। खुदार केन यमुना में मिलती है और यमुना गंगा में मिलती है। उर्मिल केन यमुना में मिलती है, यमुना गंगा में मिलती है, बोदला बेतवा, यमुना में मिलती है और फिर वह गंगा में मिल जाती है। कतरी व खुदिया नदी झारखंड के धनबाद ,दानरू(danro) नदी गढ़वा बोदला नदी गुमला एवं हजारीबाग में बहती है। खुदार व उर्मिल नदी, मध्य प्रदेश के छतरपुर और बांकी नदी छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में बहती है।
हाल ही के दिनों में अंधाधुंध भूमि उपयोग, कृषि विस्तार, बुनियादी ढांचे का विकास, कोयला, खनिज खनन और अनियंत्रित बालू की खुदाई जैसे कामों में नदियां सिकुड़ती हुई चली गई हैं। पहले देश की जमीन का 10% हिस्सा रिवर बेसिन में आता था, जो अब घटकर सिर्फ दो से लेकर 3% ही रह गया है, ऐसे में कृषि, शहरी, औद्योगिक और संरक्षित क्षेत्र में नदी को उनके पुराने स्वरूप में लाने के लिए भूमि अधिग्रहण जरूरी हो गया है। namami गंगे प्रोजेक्ट, जल जीवन मिशन जैसी सरकारी योजना में संशोधन करके अगर नदी के लिए जमीन अधिग्रहण को जोड़ लिया जाए तो उससे भी प्राकृतिक धाराओं का फिर से उद्धार संभव होगा। वॉटर सेड के जाल तंत्र की बनावट में भी गिरावट आई है। गंगा नदी बेसिन के क्षेत्र में बादल फटने, भूस्खलन, अचानक बाढ़, भूजल की कमी और मरुस्थलीकरण जैसी आपदा बढ़ रही है।
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