वैशाली jharkhand aajtak in
बिहार के लिए यह वाकई एक ऐतिहासिक दिन है, क्योंकि केंद्र सरकार ने मैथिली भाषा को संसदीय कार्यवाही के अनुवाद में शामिल करने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है। यह निर्णय न केवल बिहार की सांस्कृतिक विरासत को मजबूती प्रदान करता है, बल्कि मैथिली भाषी लोगों को भी गर्व का अनुभव कराता है।
मैथिली समेत छह अन्य भारतीय भाषाओं को संसदीय कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाया गया है। अब इन भाषाओं में लोकसभा की कार्यवाही का अनुवाद किया जाएगा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि दुनिया में भारत की सांसद एकमात्र विधायी संस्था है जहां एक साथ इतनी भाषाओं में कार्यवाही का रूपांतरण हो रहा है।
केंद्र सरकार ने संसद में दिए जाने वाले भाषणों के अनुवाद की प्रक्रिया में छह नई भाषाओं को जोड़ा है, जिनमें मैथिली के अलावा बोडो, डोगरी, मणिपुरी, उर्दू और संस्कृत शामिल हैं। पहले, संसद में भाषणों का अनुवाद 22 भाषाओं में होता था, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 28 हो गई है।यह कदम देश की भाषाई विविधता को मान्यता देने और सभी भाषाई समुदायों को उनकी मातृभाषा में संसद की चर्चाओं को समझने का अवसर प्रदान करने के लिए उठाया गया है।
केंद्र सरकार की इस पहल से मैथिली भाषा को एक नया सम्मान मिला है। यह निर्णय न केवल भाषाई विविधता को बढ़ावा देता है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक एकता को भी मजबूत करता है। बिहार के लोगों के लिए यह एक गर्व का क्षण है, क्योंकि उनकी मातृभाषा अब संसद की चर्चाओं का हिस्सा बन गई है।