झारखंड यूथ एसोसिएशन के संयोजक राजेश ओझा ने कहा है की एसोसिएशन सभी भाषा का सम्मान करती है लेकिन बेवजह झारखंड की वर्तमान सरकार भाषा के नाम पर लोगों के अंदर वैमनस्य पैदा कर रही है. जिससे बोकारो सहित अन्य जिले में काफी सौहार्द वातावरण खराब हो रहा है.
भाषा सबकी माता होती है, हमें सभी भाषा का सम्मान करना चाहिए। बोकारो और धनबाद में भोजपुरी और मगही भाषा को तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के नौकरी में शामिल करने से जो विवाद चल रहा है , इस संबंध में राजेश ओझा ने कहा की
सरकार नियुक्ति के नाम पर सिर्फ़ विवाद ला रही है .बोकारो और धनबाद में CBSE , ICSE और JAC Board की पढ़ाई होती है, मगही और भोजपुरी भाषा का कोई विकल्प तक नहीं है, यहाँ तक की जो अभ्यार्थी परीक्षा देंगे उन्हें मगही और भोजपुरी ठीक से बोलना तक नहीं आता है।
माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद बोलते है की ये कोई क्षेत्रीय भाषा नहीं है ,तो क्यों सम्मिलित किया गया, इससे साफ नजर आता है यह एक प्रेशर पॉलिटिक्स है। सरकार के पास कोई ठोस नीति नहीं है न ही नियुक्ति का कोई अता-पता है और भाषा भोजपुरी और मगही कर के नाम पर झारखंडियों को आपस में लड़ा रही है ।
उन्होंने सरकार से निवेदन किया की नियुक्ति का द्वार खोले क्योंकि यहाँ पे नौजवान बहुत सालों सालों से बेरोजगारी में बैठे हैं। उन्हें जल्द से जल्द रोजगार उपलब्ध कराया जाए।