भारत में रक्षा उद्योग में आत्मनिर्भरता

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1.भारत में रक्षा उद्योग में आत्मनिर्भरता कितनी जरूरी है ?
2.भारत की रक्षा उद्योग में रक्षा उद्योग किस बदलाव के दौर से गुजर रहा है
?

भारत का सैन्य बल विश्व का तीसरा सबसे बड़ा सैन्य बल बल है हाल ही में आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत 101 प्रकार के हथियार एवं रक्षा प्रणालियों के आयात पर रोक लगाने का निर्णय केंद्र सरकार द्वारा लिया गया है एवं स्वदेशी रक्षानिर्माण विनिर्माण पर ध्यान केंद्रित किया गया है। बता दें किं वर्तमान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी पहल की है जिसमें राइफल मालवाहक विमान सहित 101 रक्षा उपकरण एवं हथियारों के आयात पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा सरकार द्वारा मेक इन इंडिया के तहत कई कदम उठाए गए हैं जिससे भारत में स्वदेशी विनिर्माण को बल मिलेगा। जिसके अंतर्गत विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की सीमा जो 26% थी इसे बढ़ाकर 100% तक कर दिया गया है एवं सार्वजनिक क्षेत्र के अनुसार ही निजी क्षेत्र को भी अवसर प्रदान किया गया है।
हालांकि वर्तमान में भारत 70% भाग आयात करता है परंतु “मेक इन इंडिया” कार्यक्रम के तहत अगले 5 वर्षों में यह 70% तक का विनिर्माण का कार्य पूरा करेगा जिसके लिए निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्रों के इकाइयों को भी शामिल किया गया है।
शुरू से ही सैन्य क्षेत्र में समस्या बनी हुई है क्योंकि रक्षा के क्षेत्र को प्राथमिकता देनी चाहिए जो नही दिया जाता है। इस क्षेत्र का समस्या बने रहने का सबसे बड़ा कारण यह है कि इस पर बहुत काम चर्चा की जाती है एवं ध्यान भी इस पर बहुत कम दिया जाता है परंतु वर्तमान व्यवस्था में प्रशिक्षण पर ध्यान दिया जा रहा है जबकि शुरुआती दौर से ही सैन्य सुरक्षा पर सभी स्तरों पर ध्यान दिया जाना आवश्यक था। किसी सरकार द्वारा भी इस पर कुछ खास कार्य नहीं किए गए।
21वीं सदी में देश को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है जिसमें से रक्षा क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित है एवं इन सभी चुनौतियों से निपटने के लिए यह अति आवश्यक है कि आत्मनिर्भर बना जाए।


देश में शुरुआती दौर से ही रक्षा उद्योग पर ध्यान केंद्रित नहीं किया गया है बल्कि रक्षा उद्योग के लिए पास बजट में केवल 1 से 2% तक का ही भाग निर्माण के लिए देश में उपयोग होता है। भारत शुरू से ही अन्य देशों पर निर्भर रहा है। 1962 में चीन से हुए युद्ध में भी भारत ने अमेरिका से हथियार की मदद ली थी।
शुरू से ही भारत में रक्षा उद्योग के संस्थान पूर्ण रूप से सरकारी थे। भारत हमेशा से दूसरे देशों पर निर्भर रहा है। जिस कारण अब तक हम रक्षा उद्योग के क्षेत्र में आत्मनिर्भर नहीं बन पाए हैं हालांकि स्पेस इंडस्ट्रीज में प्रगति हुई है एवं स्पेस रिसर्च और सेटेलाइट के मामले में भारत को बड़ी कामयाबी हासिल हुई।
उच्च तकनीक पर आधारित एकमात्र हथियार ब्रह्मोस तैयार किया गया है परंतु यह भी रूसी सहायता से तैयार किया गया है।
पिछले 30 सालों से देश में एयरक्राफ्ट इंजन बनाने की तैयारी की जा रही है परंतु अब तक इसकी कोशिश नाकाम रही है, इसके साथ ही देश में रक्षा उद्योग को पूर्ण रूप से सरकारी रखा गया । इसे प्राइवेट इंडस्ट्रीज में शामिल करने के बारे में नही सोचा गया है। हालांकि प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप की बात 1995 से की जा रही है परंतु अब तक यह लागू नही हुआ।
आत्मनिर्भरता की बात पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम जी ने की थी और उनका कहना था कि 70% आयात एवं 30% स्थानीय को बदलकर 70% स्थानीय तथा 30% आयात का लक्ष्य प्राप्त करना है। जिसे 15 साल में प्राप्त कर लेना चाहिए था बावजूद इसके अब तक यह लक्ष्य पूरा नहीं किया गया है।


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