राज्य के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी होने को लेकर राज्यपाल चिंतित है इसे लेकर उन्होंने कहा कि आज के समय में जहां राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों की रैंकिंग होती है ऐसे में हमारा राज्य पिछड़ रहा है।
बता दें कि विश्वविद्यालयों के कुलपति के साथ विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उन्होंने बैठक की है उन्होंने बताया कि शिक्षक और विद्यार्थी को कोरोना के कारण घर पर रह रहे हैं। ऐसे में ई-लर्निंग के जरिए विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करना अच्छा होगा। उन्होंने बताया कि राज्य के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के लगभग 80 से भी ज्यादा पद रिक्त है एवं मौजूदा समय में शिक्षक छात्र अनुपात 1:73 का है ।

विश्वविद्यालयों में 2008 के बाद कोई भी नियुक्ति नहीं की गई है। राज्यपाल ने यह भी बताया कि विश्वविद्यालयों के शिक्षकों की प्रोन्नति मामले में जेपीएससी द्वारा त्रुटि सुधार के लिए भेजे गए मामले इस माह के अंदर निपटाया जाए, एवं घंटी आधारित शिक्षकों की मानदेय भुगतान की जो समस्याएं आ रही है उन पर भी ध्यान देने को कहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल के दौरान विश्वविद्यालय में एकरूपता लाया जाए। साथ ही साथ सेवानिवृत्त शिक्षकों व कर्मचारियों की समस्याओं पर भी ध्यान दिया जाए एवं समय पर उन्हें उनका मानदेय दिया जाए।
इधर कोरोना संक्रमण को देखते हुए शिक्षक पात्रता परीक्षा सितंबर में नहीं होगी। बता दे कि स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग में झारखंड एकेडमिक काउंसिल की ओर से भेजे गए पत्र के अनुसार इस वर्ष सितंबर में परीक्षा होनी थी एवं जुलाई के अंत तक आवेदन जमा लेने की प्रक्रिया भी शुरू होनी थी।