पिछली सरकार द्वारा बिना किसी जानकारी के 2017 में 90% राशन कार्ड को रद्द किया गया था उस समय स्थानीय शोधकर्ता एवं कार्यकर्ताओं ने यह दावा किया था कि रद्द किए गए राशन कार्ड फर्जी नहीं थे .

इसके बाद झारखंड के रैंडम तरीके से 10 जिलों का चयन कर अध्ययन किया गया उस अध्ययन में पाया गया कि 2016 से 2018 के बीच में रद्द किए गए राशन कार्ड में से आधे से ज्यादा राशन कार्ड आधार से जुड़े नहीं थे ।