ज़िले के 27 अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर खबरिया संकट , रद्द हो सकती है मान्यता
जिले में 27 अल्ट्रासाउंड सेंटरों के निबंधन में गड़बड़ी और अनियमितता की बात सामने आने के बाद मंत्री चंपई सोरेन ने इस गंभीरता से लेते हुए ट्वीट कर त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश उपायुक्त सूरज कुमार को दिया है। मंत्री ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामले सरकार की छवि पर विपरीत असर डालते हैं लिहाजा इनमें तत्काल कार्रवाई की जरूरत है। मंत्री के के निर्देश के बाद उपायुक्त ने अपने जवाब में बताया कि 27 सेंटरों के लिए अलग से जांच दल का गठन पूर्व में किया गया है। इस मामले में जांच टीम हर बिंदु पर अलग से जांच कर रही है उपायुक्त के अनुसार अभियान को रूटीन जांच का हिस्सा बनाया गया है ताकि पीसीपीएनडीटी एक्ट का अक्षरशः अनुपालन करवाया जा सके जिले के अल्ट्रासाउंड सेंटरों के निबंध पर h&m के अभियान निर्देशक में भी लाइसेंस निर्गत करने की प्रक्रिया की पूरी जानकारी मांगी है हालांकि दिलचस्प रूप से लाइसेंस रिन्यूअल के 5 महीने बाद भी इस मामले में कार्यवाही सुनिश्चित नहीं की जा सकती है उल्लेखनीय है कि पूर्व सिविल सर्जन डॉक्टर महेश्वर प्रसाद में समुचित पदाधिकारी बनकर सभी 27 सेंटरों का रिनुअल अपनी सेवानिवृत्ति से 4 दिन पूर्व 27 जून को स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता बता कर दिया था बताया जा रहा है कि ऐसे करने के लिए डॉक्टर महेश्वर प्रसाद में पीसीपीएनडीटी एक्ट के संचालन के लिए बनी डीएसपी कमेटी के सदस्यों को भी गुमराह किया उन्होंने किसी सदस्य को यह जानकारी नहीं दी कि अप्रैल 2018 में जारी अधिसूचना के अनुसार अल्ट्रासाउंड सेंटरों के निबंधन और किसी तरह का प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार सिर्फ और सिर्फ बतौर समुचित पदाधिकारी जिला उपायुक्त को ही है यही नहीं केंद्र सरकार ने कोविड-19 को लेकर 30 तक के लिए अल्ट्रासाउंड सेंटरों से जुड़ी तमाम गतिविधियों पर रोक लगा रखी थी इसके बावजूद समुचित पदाधिकारी बनकर 27 सेंटरों का रिनुअल 5 साल के लिए कर दिया। उस समय जिला उपायुक्त रविशंकर शुक्ला थे जो वर्तमान में एनएचएम के अभियान निर्देशक है जिनका अधीन ही पीसीपीएनडीटी गतिविधियां संचालित होती है।।