किसान रथ ऐप लॉन्च # आपके बारे में जाने विस्तार से# असम से जुड़े खास जानकारीयां

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किसान रथ ऐप लॉन्च किया गया असम में किसान को अपनी उपजी हुई फसल जैसे कि फल और सब्जियों व अनाजों को मंडी तक पहुंचाने में बहुत ही दिक्कतों का सामना करना। पड़ता था और यह जो भी परेशानियां हो रही थी यह सब इस महामारी के कारण लगी हुई लॉकडाउन से हो रही थी। इन्हीं सब परेशानियों को देखते हुए हमारे केंद्र सरकार के मन में यह विचार आया कि कैसे हैं हमारे देश के किसानों को इस परेशानियों से मुक्त कराया जाए इन्हीं सब कारणों से हमारे केंद्र सरकार ने किसान रथ ऐप को लॉन्च किया ताकि इस ऐप्प के जरिए किसान आसानी से हमारे देश के लोगों के लिए इस उपज को व्यापारियों तक पहुंचा सके और उन्हें कहीं जाने की भी जरूरत ना पड़े और उनका काम घर बैठे ही बेहद आसान तरीके से हो जाए। आजकल की इस डिजिटल दौर मे यह ऐप्प किसानों के लिए बहुत ही मददगार साबित होगा। इस ऐप्प की मदद से वे आसानी से अपने उपज को ट्रैक्टर या दूसरी उपकरणों पर किराए द्वारा पहुंचा सकेंगे। और शुक्रवार को इस ऐप्प को लांच किया गया हमारे कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा ताकि बिना किसी दिक्कतों के हमारे किसानों को इसका लाभ मिल सके और वह आसानी से बिना कहीं जाए अपने फलों और सब्जियों को बेच सकेंगे। किसान अपने फल और सब्जियों को बेचने के लिए इस ऐप की मदद से आसानी से व्यापारियों के साथ सौदा कर सकेंगे इस ऐप को डाउनलोड करने के लिए हमें एंड्राइड मोबाइल के प्ले स्टोर पर जाकर आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं। और इस आप की यह खासियत है कि इसके कारण हमारे देश के सभी किसान अपनी फसल को आसानी से बाजार तक पहुंचा सकेंगे और उनकी कहीं जाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।
इस ऐप्प में सभी प्रकार की जानकारियां मौजूद रहती है जैसे कि किस प्रकार हमारे देश के सभी किसान और व्यापारियों को ट्रक के साथ दूसरे माल ढोने वाले वाहनों के बारे में जानकारी मिल सके।

इस ऐप्प में वाहन के आने का समय और जगह भी सूचित की जाएगी कि कौन सा वाहन कब और कितने बजे तक आएगी। और यही बताए गए समय के अनुसार वे अपने फल और सब्जियों और अनाजों को सही जगह पर बेच सकेंगे। इस ऐप्प की मदद से हमारे देश के सभी ट्रांसपोर्टर्स अपने वस्तुओं को पहुंचाने के लिए अपनी वाहनों का रजिस्ट्रेशन इस ऐप्प में करा सकते हैं। और इस ऐप्प को उपयोग में लाने के लिए उपभोक्ता के पास एंड्रॉयड स्मार्टफोन होना बेहद ही जरूरी है क्योंकि जो कुछ भी होगा वह मोबाइल के जरिए ही होता है। इसके लिए हमें गूगल प्ले स्टोर में सबसे पहले किसान रथ ऐप को डाउनलोड करना पड़ता है और इसके बाद हमें अपना नाम या जो भी व्यक्ति जो कि रजिस्ट्रेशन करना चाहते हैं उनका नाम ,उनका मोबाइल नंबर, उन्हीं का आधार नंबर जो कि बेहद जरूरी होता है को भरकर हम इसे पीएम किसान एप्प के लिए रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं और यदि कोई व्यापारी होता है तो उसे भी जरूरी दस्तावेजों के लिए उसे उस कंपनी का नाम, अपना नाम, अपना मोबाइल नंबर की सभी महत्वपूर्ण जानकारी भरकर रजिस्ट्रेशन करनी पड़ती है। इस ऐप्प पर पर लॉगइन करने के लिए सभी यूजर को उनका मोबाइल नंबर और पासवर्ड डालना पड़ता है और यह सभी प्रोसेस स्टेप बाय स्टेप रजिस्ट्रेशन के बाद करनी पड़ती है। हमारे देश की सरकार ने इसे सुविधाजनक बनाने हेतु इस ऐप को हिंदी अंग्रेजी के अलावा कई भाषा में भी इसे लांच कर दिया है। और इस ऐप्प को अच्छी तरीके से विकसित करने के लिए नेशनल इनफार्मेशन सेंटर की मुख्य भूमिका रही है। ताकि इस ऐप की मदद से देश के सभी किसानों और व्यापारियों को लाभ मिल सके जो अपनी फसल को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए वाहनों की तलाश में जुटे हुए हैं।और इस ऐप्प की सबसे खास बात यह है कि यह हमारे देश के किसानों को उनके फल और सब्जियों को मंडियों ,वेयरहाउस और कलेक्शन सेंटर तक पहुंचाने के लिए वाहन बुक करने में भी बहुत सहायता करती है और वाहन से जुड़े तमाम जानकारियां जैसे कि वाहनों का समय और जगह इस ऐप्प में सूचित रहती है।
इस ऐप्प से किसान संगठन (एफपीओ) केंद्र, गांव हॉट ,गोदाम, रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डे ,प्रोसेसिंग यूनिट, थोक और खुदरा बाजारों तक फसलों ले आने और ले जाने में मदद मिलेगी यह देश भर में पाँच लाख ट्रक और बीस हजार ट्रैक्टर जुड़े हैं इससे फसलों को बर्बाद होने से रोका जा सकेगा कोरोनावायरस महामारी के दौरान देश मे एग्रीकल्चरल सप्लाई चैन मैनेजमेंट को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।


और इस ऐप को असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कृषि उत्पादों की समय पर बिक्री की सुविधा के लिए लांच किया। और यह राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र द्वारा विकसित की गई और तकनीकी रूप से बनाया गये इस ऐप्प को असम एग्रीबिजनेस एंड रूरल ट्रांसफॉरमेशन परियोजना द्वारा जमीन पर लागू किया जाएगा, जो मदद करेगा किसानों और व्यापारियों को प्रशिक्षण देने के लिए यह ऐप्प असम के किसानों के लिए देशभर में बाजार खोलकर उनकी उपज का सबसे अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए कृषि से जुड़े व्यवसायों को बढ़ाने में मदद करेगी। आजकल की इस प्रतिस्पर्धा भरी दौर से बाहर आने के लिए और उपज को बढ़ाने में यह वरदान के रूप में साबित होगी। यह किसानों की आय को दोगुना करने में मदद करेगी और केंद्र सरकार की योजनाओं जैसे पीएम किसान सम्मान निधि, कृषि सिंचाई योजना, फसल बीमा योजना, केसीसी ने देशभर में कृषि की उपज को विकसित करने में मदद करेगी। कृषि ,बागवानी और खाद्य प्रसंस्करण मंत्री अतुल बोरा के कहने के अनुसार कोरोनावायरस से पीड़ित देश के सभी नागरिकों को इस कठिनाइयों के दौर में असम के भीतर और 357 करोड़ रुपए के बाहर की सब्जियां बेची गई और 5000 से अधिक किसानों ने विक्रेताओं के रूप में कार्य किया जिससे राज्य में किसानों के बाजारों को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
असम उत्तर पूर्वी भारत में एक राज्य है या दूसरी उत्तर पूर्वी भारतीय राज्यों से घिरा हुआ है यह भारत का सीमांत राज्य है जो कई पर्वत श्रेणियों से घिरा हुआ है। गुवाहाटी इसका सबसे बड़ा शहर है इसका गठन 26 जनवरी 1960 में किया गया था इसके राज्यपाल है जगदीश मुखी मुख्यमंत्री हैं सर्बानंद सोनोवाल इनक विधानसभा में 126 सीटें राज्यसभा में 7 सीटें लोकसभा में 14 सीटें और इसका उच्च न्यायालय हैं गुवाहाटी उच्च न्यायालय इसमें कई पर्वत मालाएं नदी द्वीप पहाड़ियां जैसी प्राकृतिक खूबसूरती पाई जाती हैं। भारत- भूटान तथा भारत -बांग्लादेश सीमा कुछ भागों में असम से जुड़ी है।इस राज्य के उत्तर में अरुणाचल प्रदेश, पूर्व में नागालैंड और तथा मणिपुर ,दक्षिण में मिजोरम तथा मेघालय एवं पश्चिम में बांग्लादेश स्थित है।
असम नाम संस्कृत से लिया गया है जिसका मतलब है वह भूमि जो समतल नहीं है ।”आसाम” संस्कृत के शब्द अस्म अथवा “असमा” जिसका मतलब है और समान नहीं होना यह शब्द संस्कृत के असोमा शब्द से बना है इसका मतलब है अनुपम अथवा आदित्य।आस्ट्रिक,मंगोलियन, द्रविड़ और आर्य जैसे कई प्रकार की जातियां इंकार से इस प्रदेश की पहाड़ियों और घाटियों में समय-समय पर आकर बसी हुई है और यहां की कला संस्कृतियों में अपना महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। असम को अपनी संस्कृति और सभ्यता के रूप में जाना जाता है। कि राज्य में पहले मणिपुर को छोड़कर बांग्लादेश से पहले मे स्थित भारत का पुरा क्षेत्र सम्मिलित था हिमालय की नए प्रकार के मोड़दार ऊंचे पर्वत श्रेणियों तथा पूराकैब्रियन युग के प्राचीन भूखंडों के साथ नदी ब्रह्मपुत्र निर्मित समतल मे मैदान बहुत उपजाऊ है लेकिन अलग-अलग क्षेत्रों की अपनी संस्कृति पर आधारित आसाम के ब्रह्मपुत्र के घाटी (असम की घाटी )अलग अस्तित्व के कुछ क्षेत्र जो प्रतिशत मात्र तक ही सीमित थी। इसकी राजधानी दिसपुर और यह और यहां की भाषा आसामी बंगाली और हिंदी है इसका क्षेत्रफल लगभग 78,438 वर्ग किलोमीटर है और यहां के लोग साक्षरता के मामले में लगभग 72.18 प्रतिशत है और इसकी आबादी में लगभग 61 प्रतिशत हिंदू आबादी है 35 प्रतिशत आबादी मुस्लिम 4% ईसाई और बाकी जैन बौद्ध आदि धर्मों से संबंधित होते है प्राचीन भारतीय ग्रंथों में इस स्थान को प्रागज्योतिच्ह के नाम से जाना जाता था महाभारत के अनुसार कृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध ने यहां की उषा नाम की युवती पर मोहित होकर उसका अपहरण कर लिया था श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार उषा ने अपनी सखी चित्रलेखा द्वारा अनिरुद्ध को अपहरण करवाया और यह बात की पुष्टि दंतकथा में भी पाई जाती हैं। प्राचीन असम कमरूप के नाम में जाना जाता है यह शक्तिशाली राजवंशों का शासन था वर्मन और कामरूप पाल पुश्य वर्मन ने वर्मन राज्य वंश की स्थापना की थी। भास्कर वर्मन जो की प्रसिद्ध वर्मन शासक थे इसके शासनकाल में चीनी यात्री क्षुअन झांग क्षेत्र का दौरा किया और अपनी यात्रा दर्ज की। वर्तमान में असम बाढ़ गरीबी पिछड़ेपन तथा विदेशी के जबरन आने का मुख्य रूप से बांग्लादेशी मुस्लिम और ईसाई मिशीनरियों का शिकार ग्रस्त हो गया इसकी सबसे बड़े कारण फासीवादी विचारधारा और दंगा वाली विचारधाराओं से ग्रस्त हैं
यदि हम असम की कृषि के बारे में कहे तो असम राज्य कृषि मे भरपूर मात्रा में निर्मित है यहां की फसलें बहुत ही अच्छी है और यह कृषि प्रधान नाम राज्य से भी जाना जाता है ।और यहां की अर्थव्यवस्था का मुख्य स्रोत कृषि ही है। यहां की मुख्य खाद्य फसलें हैं चावल और इसके साथ जूट, कपास ,चाय, तिलहन, गन्ना और आलू यहां की नगदी फसलों में शामिल होती हैं। अनेक प्रकार के फल जैसे कि संतरा, केला, सुपारी, नारियल, आम ,अमरूद, राज्य की प्रमुख बागवानी यहां पर की जाती है और छोटे स्तर पर ही होती है इनकी राज्य में लगभग 39.54 हेक्टेयर जमीन खेती करने लायक है और 27.1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही खेती की जाती है। और यदि हम जनसंख्या की बात कहे तो असम में लगभग दो-तिहाई जनसंख्या खेती करती हैं और दस प्रतिशत लोग चाय के बागान में और कई दूसरी प्रकार की दृष्टि कृषि से जुड़े व्यवसाय में कार्य करते हैं विदेशी मुद्रा की आय के स्रोत के रूप में मुख्य रूप से चाय और पटसन की खेती ब्रह्मपुत्र घाटी में की जाती है और कई तरह की फसलें जैसे कि तिलहन दाल मटर फल और खली जिसमे की एक तिलहन इसके चार पत्ते के काम आते हैं जैसे कि आलू और फल राज्य के खाद्यान्न की कुल खेती खपत से ज्यादा होती हैं जितनी उनकी खेती की जरूरत होती है उससे कहीं अधिक खेती की जाती है। जबकि दाल और तिलहन से यहां की आवश्यकता तो पूरी नहीं हो पाती है लेकिन अब इनकी खेती में काफी बदलाव आए हैं यहां के लोग दुहरी फसलो और कृषि के आधुनिक तरीकों का प्रयोग करने लगे हैं।


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