सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट की सुविधा अनिश्चितकाल तक बंद करने की बात पर कहा कि है यह मौलिक अधिकार है अनुच्छेद-19 के अनुसार व्यक्ति के मौलिक अधिकारों में से एक है इसे अनिश्चितकाल के लिए बंद नहीं किया जा सकता हैं।

यह मौलिक अधिकार संविधान से संरक्षण प्राप्त है , दूरसंचार सेवा का अस्थाई निलंबन नियम- 2017 के अनुसार इंटरनेट सेवा को अनिश्चितकाल के लिए बंद नहीं किया जा सकता. गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करने , धारा 370 हटाने के संबंध में एवं तमाम बंद की गई सुविधाओ से जुड़े मामले पर फैसला सुनाया गया।

ये याचिकायें कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन समेत कई अन्य लोगों ने बंद की गई सुविधाओ के खिलाफ याचिका दायर की थी बता दें कि इसकी अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी।