असम में नए भारत कृषि अनुसंधान संस्थान का उद्घाटन (National current affairs)

Share The News

हाल ही में असम में नए भारत कृषि अनुसंधान संस्थान का उद्घाटन नरेंद्र सिंह तोमर ने किया।भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान कृषि अनुसंधान, शिक्षा एवं प्रसार का देश का प्रमुख राष्ट्रीय संस्थान है। इसे यूजीसी अधिनियम 1956 के अंतर्गत ‘मानद विश्वविद्यालय’ का दर्जा प्राप्त है तथा यहां कृषि के विभिन्न विषयों में एम.एससी. व पीएच.डी. की उपाधियां प्रदान की जाती हैं।भारतीय कृषि की पिछले 100 वर्षों से अधिक की प्रगति मुख्यत: इस संस्थान द्वारा किए गए अनुसंधानों और यहां से सृजित की गई प्रौद्योगिकियों से जुड़ी हुई है। हरित क्रांति इस संस्थान के खेतों में ही जन्मी थी। सभी प्रमुख फसलों की ऐसी उपजशील किस्मों का विकास जो पूरे देश के व्यापक क्षेत्रों में उगाई जा रही है, उत्पादन प्रौद्योगिकियों का सृजन एवं उनका मानकीकरण, समेकित नाशकजीव प्रबंध तथा समेकित मृदा-जल-पोषक तत्व प्रबंध इस संस्थान के अनुसंधान की प्रमुख उपलब्धियां रही हैं।
पूसा संस्थान’ के नाम से लोकप्रिय भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की स्थापना मूल रूप से पूसा (बिहार) में एक अमेरिकी समाजसेवक मि. हेनरी फिप्स द्वारा दिये गए 30,000 पाउन्ड् के सहयोग से 1905 में हुई थी। मूल रूप में यह संस्थान ‘इम्पीरियल कृषि अनुसंधान संस्थान था जो ब्रिटिश काल में में स्थापित किया गया था। सन् १९३४ में बिहार में एक भयंकर   भूकंप आया जिसमें इस संस्थान के मुख्य भवनों को काफी क्षति हुई। इसके परिणामस्वरूप उसी वर्ष इस संस्थान को नयी दिल्ली स्थानान्तरित कर दिया गया जिसे ‘पूसा कैम्प्स’ कहा गया। आगे चलकर दिल्ली स्थित यह संस्थान का नाम ‘भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान’ कर दिया गया। और पूसा में जो कुछ बचा रहा उसे पदावनत करके ‘कृषि अनुसंधान स्टेशन’ कहा जाने लगा। अन्तत: ३ दिसम्बर सन् १९७० को भारत सरकार ने इसी को नामान्तरित करके ‘राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय’ के रूप में बदल दिया।
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान को पानी के प्रबंधन के लिए क्षेत्र आधारित प्रौद्योगिकी का विकास और पानी के वितरण और प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक दिशा निर्देश दिए गए।यह सिंचाई कमांड क्षेत्रों में आउटरीच कार्यक्रम अनुसंधान और प्रशिक्षण, और जल विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के रूप में काम करती है।


कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग, कृषि मंत्रालय, भारत सरकार के तहत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एक स्वायत्तशासी संस्था है। रॉयल कमीशन की कृषि पर रिपोर्ट के अनुसरण में सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 के तहत पंजीकृत और 16 जुलाई, 1929 को स्थापित इस सोसाइटी का पहले नाम इंपीरियल काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च था। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का मुख्यालय नई दिल्ली स्थित है।
भारत वर्ष में बागवानी, मात्स्यिकी और पशु विज्ञान सहित कृषि के क्षेत्र में समन्वयन, मार्गदर्शन और अनुसंधान प्रबन्धन एवं शिक्षा के लिए परिषद सर्वोच्च निकाय है। देश भर में फैले 101 भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थानों और 71 कृषि विश्वविद्यालयों सहित यह विश्व में सर्वाधिक विस्तृत राष्ट्रीय कृषि पद्धति है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने देश में हरित क्रांति लाने और उसके बाद कृषि में निरन्तर विकास में अपने अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास से अग्रणी भूमिका निभाई है। जिससे वर्ष 1950-51से 2017-2018 खाद्यान्न का उत्पादन 5.6 गुणा, बागवानी फसलें 10.5 गुणा, मत्स्य उत्पादन 16.8 गुणा, दूध 10.4 गुणा और अंडा उत्पादन 10.4 गुणा बढ़ा है। राष्ट्रीय खाद्य और पोषण सुरक्षा पर इसका प्रत्यक्ष प्रभाव देखा जा सकता है। कृषि में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता बढ़ाने में परिषद की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विकास में यह अद्यतन क्षेत्रों में संलग्न है और इसके वैज्ञानिक अपने क्षेत्रों में अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हैं।


Share The News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *