मध्य प्रदेश के जंगल में सोन नदी के समीप राजमाड़ा में सीताराम साधू 2003 के कुटिया बनाकर रह रहे हैं जिसमें एक भालू परिवार उनके भजन का भक्त बन गया है वह भालू परिवार रोज उनके भजन को सुनने आता है एवं चुपचाप भजन सुनकर अंत में प्रसाद लेकर वापस लौट जाता है।

सीताराम ने बताया कि यह सिलसिला उस दिन शुरू हुआ जिस दिन में उन्होंने वहां कुटिया बना कर पूजा-पाठ एवं भजन करना शुरू किया है।

एक दिन उन्होंने देखा कि वह भजन गा रहे हैं तो एक भालू उनके पास आकर बैठा चुपचाप उनका भजन सुन रहा हैं, उसके बाद से ही यह सिलसिला शुरू हो गया जो अब तक जारी है।