मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबड़े ने कहा कि विकसित देशो में 97 फ़ीसदी मामलों का निपटारा आर्बिट्रेशन व मध्यस्थता के द्वारा किया जाता है पर भारत मे इसका उल्टा है परंतु भारत और यह एक गहन चिंतन का विषय है जिस पर हमें सोचना चाहिए।
फिक्की के अध्यक्ष ने बताया कि आर्बिट्रेशन के द्वारा व्यवसायिक मामले को सुलझाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि यहां कोर्ट में लंबी मौखिक बहस होती है परंतु मध्यस्थता संक्षेप में होनी चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है।

आर्बिट्रेशन और कंसलिएशन एक्ट 1996 के तहत व्यवसायिक मामलों को मध्यस्थता द्वारा तेजी से निपटारा किया जा सकता है। जिसमें अदालत के तहत मोटर दुर्घटना, भूमि, वैवाहिक ,परिवार का मामला मध्यस्थता के द्वारा सुलझाया जा सकता है है लेकिन यह तब संभव होता है जब दोनो पक्ष राजी होते हैं।